संपादकीय: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की हो रही तैयारी

MK Stalin Government: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके-एआईएडीएमके के बीच मुकाबला, फिल्मी सितारों की राजनीति, गठबंधन समीकरण और बीजेपी की रणनीति का विश्लेषण।
Tamilnadu, MK Stalin
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव (सौ. सोशल मीडिया)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: तमिलनाडु में इस वर्ष विधानसभा चुनाव होने जा रहा है जिसमें बहुकोणीय मुकाबला होगा। राज्य मेुं 234 विधानसभा सीटें हैं। 2021 के चुनाव में एमके स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने 173 सीटों पर लड़कर 133 सीटें जीती थीं। कोविड महामारी की छाया में हुए इस चुनाव में वहां की जनता ने एम करुणानिधि के पुत्र स्टालिन के नेतृत्व पर अपने विश्वास की मुहर लगा दी थी। करुणानिधि के निधन के बाद यह तमिलनाडु का पहला चुनाव था। यद्यपि इस दक्षिणी राज्य में डीएमके और एआईएडीएमके ही प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियां हैं लेकिन फिर भी अन्य पार्टियां अपना भाग्य आजमाती हैं। सभी क्षेत्रीय पार्टियां तमिल अस्मिता का मुद्दा जोर-शोर से उठाती हैं।

इस बार डीएमके ने जो गठबंधन बनाया है उसमें वीसीके, एमएनएम (कमल हासन), एमडीएमके (वाइको) लेफ्ट पार्टियां और कांग्रेस का समावेश है। इसके खिलाफ बने गठबंधन में एआईएडीएमके, पीएमके (रामदास) बीजेपी का समावेश है। बीजेपी चाहती है कि एएमएके (दिनाकरन) तथा डीएमडीके (स्व। अभिनेता विजयकांत की पार्टी) एनडीए में लौट आएं। तमिलनाडु की राजनीति में हमेशा से फिल्मी हस्तियों का प्रभाव रहा है। एमजी रामचंद्रन वहां के सुपरस्टार थे। उन्होंने अपनी उत्तराधिकारी के रूप में जयललिता को तैयार किया था। जयललिता का मुकाबला एम करुणानिधि की पार्टी डीएमके से होता था। करुणानिधि तमिल फिल्मों के पटकथा लेखक थे। जब जयललिता मुख्यमंत्री थीं तो उन्होंने आधी रात में पुलिस भेजकर करुणानिधि को नींद से जगाकर गिरफ्तार करवाया था। डीएमके तथा एआईएडीएमके के बीच प्रतिशोध की राजनीति थी।

जयललिता के निधन के बाद उनकी सहेली शशिकला नटराजन ने पार्टी पर कब्जा जमाना चाहा लेकिन नाकाम रहीं। ई पलानीसामी एआईएडीएमके का नेतृत्व कर रहे हैं। फिल्म स्टार विजय की भारी लोकप्रियता का लाभ उनकी पार्टी को मिल सकता है। विजय की पार्टी टीवीके की रैली में भारी भगदड़ मची थी जिससे लोग हताहत हुए थे। दोनों ही गठबंधन विजय की पार्टी को अपने साथ लाना चाहते हैं। तमिलनाडु के चुनाव प्रचार में नेताओं के बड़े-बड़े कटआउट लगते हैं तथा जनता भी अभिनेताओं को देवता के समान पूजती है। इसके अलावा सभी पार्टियां जनता के बीच चुनावी खैरात बांटने में पीछे नहीं रहतीं।

चुनावी मुफ्तखोरी की शुरूआत जयललिता व करुणानिधि के समय से ही वहां शुरू हुई। बाद में अन्य राज्यों में यह सिलसिला आगे बढ़ा। तमिलनाडु में बीजेपी पूरी ताकत से अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही है। हिंदी विरोध की राजनीति तमिलनाडु की तमाम पार्टियां करती हैं। उनका मानना है कि बीजेपी की केंद्र सरकार तमिलों पर हिंदी लादना चाहती है। इस पर भी प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री अमित शाह वहां चुनावी सभाएं करेंगे और संभव है कि कुछ वाक्य तमिल में भी बोलें।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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