बिहार में अब होगी NDA की असली अग्निपरीक्षा! महागठबंधन को भी चुनौती, माया-ओवैसी बिगाड़ेंगे किसका गेम?
Bihar Assembly Elections: 11 नवंबर को बिहार के सीमांत इलाकों में वोटिंग होनी है। जिसमें यूपी से लगे तीन जिलों के साथ नेपाल की सीमा से सटा मिथिलांचल और बंगाल बॉर्डर से लगा हुआ सीमांचल शामिल है।
- Written By: अभिषेक सिंह
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण मे जनता 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर राजनैतिक दलों और उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला कर चुकी है। अब दूसरे चरण के रण की बारी है। जिसके तहत 11 नवंबर को 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है। दूसरे चरण के लिए सियासी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
11 नवंबर को बिहार के सीमांत इलाकों में वोटिंग होनी है। जिसमें उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ पश्चिमी चंपारण, कैमूर और रोहताश शामिल है। तो वहीं, नेपाल की सीमा से सटा मिथिलांचल भी है। इसके अलावा बंगाल के बॉर्डर से लगा हुआ सीमांचल और झारखंड से सटे हुए जिलों में भी वोटिंग होनी है।
बीजेपी-मांझी की असली अग्निपरीक्षा
इस लिहाज से देखें तो इस तरह पहले चरण में एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार की साख दांव पर लगी थी, तो दूसरे चरण में बीजेपी और जीतन राम मांझी की असली अग्निपरीक्षा होनी है। दूसरी तरफ महागठबंधन में राजद-कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती होगी तो असदुद्दीन ओवैसी की साख पर भी सवाल होगा। क्योंकि 2020 में AIMIM ने इसी चरण की सीटों विजय हासिल कर सबकों चौंकाया था।
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2020 में किसी मिली थी कितनी सीट?
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में, एनडीए के सामने उन 122 सीटों पर अपनी सीटें बचाने की चुनौती है जहां मतदान होना है, जबकि महागठबंधन को वापसी के लिए पूरी ताकत लगानी होगी। 2020 के चुनाव परिणामों के आधार पर, एनडीए के पास 66 सीटें थीं, जबकि महागठबंधन ने 50 सीटें जीती थीं। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने पांच सीटें जीतीं, जबकि बसपा ने एक सीट जीती।
भाजपा ने जीती थीं 42 सीटें
दूसरे चरण में भाजपा ने सबसे ज्यादा 42 सीटें जीतीं, जबकि जदयू केवल 20 सीटें ही जीत पाई। एनडीए की सहयोगी जीतन राम मांझी की पार्टी ने इस क्षेत्र की सभी चार सीटें जीतीं। वहीं, महागठबंधन में शामिल राजद ने 33 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को केवल 11 सीटें मिलीं। भाकपा (माले) ने पांच सीटें और बसपा ने एक सीट जीती। इसके अलावा, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने पांच सीटें जीतीं, और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक सीट जीती।
चिराग के लिए भी साख का सवाल
2020 के चुनाव नतीजों को देखते हुए दूसरे चरण में सबसे बड़ी चुनौती एनडीए, खासकर भाजपा के लिए है, जिसके सामने अपनी सीटें बचाए रखने की चुनौती है। पहले चरण में जहां जदयू की साख दांव पर थी, वहीं दूसरा चरण भाजपा और जीतन राम मांझी के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी। चिराग पासवान को भी अपने गढ़ में खुद को साबित करना होगा, क्योंकि जमुई जैसे इलाकों में चुनाव हो रहे हैं।
2020 में ओवैसी ने दिया था झटका
महागठबंधन की सत्ता में वापसी पूरी तरह से राजद-कांग्रेस के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। कांग्रेस 2020 में इस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी, उसे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से झटका लगा था। इसके अलावा, भाकपा (माले) को भी अपनी सीटों का कोटा बरकरार रखना होगा, जबकि राजद के सामने न केवल अपनी पिछली सीटें बचाए रखने, बल्कि उन्हें बढ़ाने की भी चुनौती होगी।
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मायावती बिगाड़ेंगी किसका गेम?
इसके अलावा 2020 में बसपा इसी क्षेत्र में अपना खाता खोलने में कामयाब रही थी। इस बार भई मायावती ने अपनी एकमात्र रैली कैमूर ज़िले के भभुआ विधानसभा क्षेत्र में की, जहां से उनका पूरा ध्यान चारों सीटों पर है। ओवैसी ने पूरी तरह सीमांचल पर ध्यान केंद्रित किया है, जहां पिछले चुनाव में उन्हें पांच सीटें मिली थीं। AIMIM दूसरे चरण में लगभग 19 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जहां मुस्लिम मतदाता 30 प्रतिशत से ज्यादा हैं।
