

देशभर में मानसून की तेज बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में अब तक सामान्य से 15% अधिक बारिश हो चुकी है। भारी बारिश के चलते मध्य प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान और पूर्वोत्तर के राज्यों में बाढ़, सड़क टूटने और भूस्खलन की घटनाएं खूब सामने आई हैं। कई जगहों पर जनहानि हुई है, वहीं अनेक नदी-नालों में जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है।
देश में औसतन इस समय तक 221.6 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार 254 मिमी रिकॉर्ड की गई है। मध्य प्रदेश में भारी बारिश से बालाघाट, मंडला, इटारसी और कटनी जैसे जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। अनूपपुर में एक पुल टूटने से कार बह गई, जिसमें पति-पत्नी और दो बच्चों की मौत हो गई। हिमाचल में पिछले 6 दिनों में बारिश से 14 मौतें हुईं और 28 लोग लापता हैं। उत्तराखंड के पीपलकोटी में भूस्खलन से बद्रीनाथ हाईवे बंद हो गया है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं।
खतरे का निशान से ऊपर नदियों में उफान केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की चार प्रमुख नदियों में भीषण बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। मध्य प्रदेश की नर्मदा नदी मंडला में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि महाराष्ट्र में भंडारा की वैनगंगा नदी में भी जलस्तर बढ़ा है। असम के गोलाघाट और नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी उफान पर है। देशभर में 11 नदियां चेतावनी स्तर को पार कर चुकी हैं, जिनमें असम, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश की नदियां शामिल हैं।
राज्यों में बाढ़ का असर, हाईवे और सड़कें बंद उत्तर प्रदेश में एल्गिनब्रिज पर घाघरा नदी, बिहार के डुमरिया घाट पर गंडक, ओडिशा की बैतरणी और जलका नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। राजस्थान के दौसा में दीवार गिरने से महिला की मौत हो गई, जबकि झुंझुनूं में बाघोली नदी के तेज बहाव से NH-52 को जोड़ने वाली सड़क धंस गई। सीडब्ल्यूसी ने 35 डैम और बैराजों के लिए जलप्रवाह पूर्वानुमान जारी किए हैं, जिनमें श्रीशैलम, मैथन, आलमट्टी और इंदिरा सागर जैसे जलाशय शामिल हैं। बता दें कि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश में कमी आने की संभावना जताई है, जिससे हालात थोड़े सामान्य हो सकते हैं।