पैदल सेना भी करेगी दुश्मनों की मिसाइलों को तबाह, हवा में ही मार गिराने की दी जा रही स्पेशल ट्रेनिंग

Indian Army Ground Troops: भारतीय सेना और अत्याधुनिक हथियारों से लैस करने के साथ-साथ अब उन्हें विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। यह ट्रेनिंग कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलों को गिराने की है।
Infantry is being given special training to destroy missiles
आर्मी के जवान।
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Indian Army Air Defence: अगले कुछ महीनों में पैदल सेना के सैनिक भी हाईटेक मिसाइलों का शिकार करते दिखें तो चौंकाने वाली बात नहीं होगी। पाकिस्तान और चीन की ओर से आने वाले हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना एयर डिफेंस ऑपरेशंस में बड़ा स्ट्रेटेजिक बदलाव कर रही। दुश्मन की सब सोनिक क्रूज मिसाइलों को हवा में ही गिराने के लिए सैनिकों को खास ट्रेनिंग दी जा रही।

भारतीय सेना के जवान फिलहाल कंधे से दागी जाने वाले मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) का इस्तेमाल केवल हेलीकॉप्टर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को निशाना बनाने के लिए करते थे, लेकिन अब इसे सब-सोनिक क्रूज मिसाइलों के बढ़ते खतरे का मुकाबला करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।

मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम का होगा इस्तेमाल

भारतीय सेना के जवानों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही, ताकि जमीन पर मौजूद सैनिक सब-सोनिक क्रूज मिसाइलों को रोक पाएं। क्रूज मिसाइलें रडार की नजर में आने से बचने के लिए जमीन के बहुत करीब उड़ती हैं, इसलिए मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर इन्हें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले रोकने की कोशिश होगी। नए जमाने के युद्ध में मिलिट्री ठिकानों और महत्वपूर्ण संपत्तियों के लिए सबसे बड़ा खतरा आधुनिक क्रूज मिसाइलें ही हैं। ये एयर डिफेंस नेटवर्क की नजर में आसानी से न आतीं। बहुत कम ऊंचाई पर जमीन के करीब रहकर ये रडार को धोखा देती हैं।

सब सोनिक क्रूज मिसाइलों को बनाएंगे निशाना

कम ऊंचाई वाली सब सोनिक क्रूज मिसाइलों को जमीन पर मौजूद सैनिक देख सकते हैं। MANPADS से लैस अच्छी तरह से प्रशिक्षित सैनिक इन मिसाइलों को उनके आखिरी चरण में उन्हें हमला कर गिरा सकते हैं। सैनिकों को दी जा रही ट्रेनिंग फ्रंटलाइन और दूर-दराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में खासकर काम आएगी, जहां भारी एयर डिफेंस बैटरी आसानी से तैनात नहीं की जा सकती हैं। MANPADS का गाइडेड सिस्टम क्रूज मिसाइलों को उनके हीट सिग्नेचर से डिटेक्ट और लॉक कर उन पर जवाबी फायर कर सकते हैं।

रूस से इग्ला एस मिसाइलों की खरीद

सेना ने हाल में आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत रूस में बनी इग्ला एस मिसाइलों को शामिल किया है। इससे एयर डिफेंस शील्ड को मजबूत किया जा रहा। इगला एस सिस्टम पोर्टेबल, कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें हैं, जिन्हें दुश्मन के कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हथियारों को मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) स्वदेशी वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) कार्यक्रम को भी आगे बढ़ा रहा। भारतीय सेना आधुनिक हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए पैदल सेना को भी ट्रेन कर रही। भविष्य में पैदल सेना के सैनिक भी हाईटेक मिसाइलों शिकार करते दिखें तो चौंकाने वाली बात नहीं होगी।

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