कैसे नारायण साकार हरि बन गए सूरजपाल, आखिर क्या है 'भोले बाबा' की कहानी?

कहा जा है कि हाथरस भगदड़ के जिम्मेदार नारायण सकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग के दौरान यह भगदड़ मची वह फरार हो चुके हैं। इस ख़बर के बाद आपके जेहन में एक सवाल यह ज़रूर उठ रहा होगा कि आखिर यह बाबा कौन हैं? कैसे बाबा के इतने फॉलोवर्स हो गए? बाबा कितने रसूखदार हैं? इन सवालों के जवाब जान लीजिए
Narayan Sakar Hari BHole Baba
नारायण सरकार हरि उर्फ भोले बाबा (डिजाइन फोटो)
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नई दिल्ली : हाथरस में सत्संग के दौरान मची भगदड़ में 107 से ज्यादा मौते हो चुकी हैं। मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हादसे ने यूपी ही नहीं बल्कि पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। वहीं, ख़बर यह आ रही है कि जिस नारायण सकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग के दौरान यह भगदड़ मची वह फरार हो चुके हैं। इस ख़बर के बाद आपके जेहन में एक सवाल यह ज़रूर उठ रहा होगा कि आखिर यह बाबा कौन हैं? कैसे बाबा के इतने फॉलोवर्स हो गए? बाबा कितने रसूखदार हैं?

आपने तमाम कथावाचकों के बारे में सुना होगा। जिनके कार्यक्रम में लाखों की भीड़ इकट्ठा होती है। जिनके कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। लेकिन आज से पहले आपने शायद ही नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा का नाम सुना हो। इसके बावजूद हाथरस में बाबा के कार्यक्रम में भी अकूत भीड़ इकट्ठा हुई। अनुयायी बाबा की पगधूलि पाने के लिए पागल हो गए। नतीजा यह हुआ कि भगदड़ मच गई और 107 जिंदगियां काल के गाल में समा गईं।

जानिए कौन हैं भोले बाबा

जानकारी के मुताबिक बाबा एटा के बहादुर नगरी गांव के रहने वाले हैं। मॉर्डन टाइप के संत है। सूट-बूट और रंगीन चश्में में पत्नी के साथ सत्संग करते हैं। नारायण साकार का वास्तविक नाम सूरजपाल बताया जाता है। कहते हैं कि नारायण साकार उर्फ भोले बाबा खुद यह दावा करते हैं कि अध्यात्म में आने से पहले वह आईबी में अधिकारी थे। बाद में नौकरी से ज्यादा अध्यात्म में मन लगने लगा। पटियाली में उन्होंने अपना पहला आश्रम बनाया। ‘मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम’ सत्संग करने लगे।

दलितों वंचितों में तेजी से बढ़ी पैठ

सत्संग के बाद दलितों और वंचितों में बाबा की पैठ तेजी से बढ़ी। नारायण साकार हरि के अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी। धीरे-धीरे यह संख्या लाखों में पहुंच गई। लोगों की मानें तो बाबा खुद को ब्रह्मांड का स्वामी कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की तरह अपना मुंह खोलकर अनुयायियों को ब्रह्मांड दिखाने का भी दावा करते हैं। लेकिन इस दावे की सच्चाई क्या है किसी को नहीं पता। बताया तो यह भी जा रहा है कि बाबा के पास राजनीतिक रसूख वाले लोग भी आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

पहले भी हुआ है कांड

बाबा का नाम पहली बार तब चर्चा में आया जब इन्होंने कोरोना काल के बाद फर्रुखाबाद में मई, 2022 में इनके सत्संग का आयोजन किया था। तब जिला प्रशासन की तरफ से सत्संग में 50 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी गई। लेकिन कार्यक्रम में अनुमति का मजाक उड़ाते हुए 50 हजार से अधिक की भीड़ सत्संग में इकट्ठा कर ली। भीड़ के चलते शहर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई। उस समय जिला प्रशासन ने कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।

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