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होने वाले पीएम के सामने लड़ा चुनाव…हार के बाद बने बाजीगर, वो नेता जिसका हौसला नहीं तोड़ पाई जेल की सलाखें
DK Shivakumar Biography: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का आज जन्मदिन है। राजनीति के 'संकटमोचक' माने जाने वाले शिवकुमार ने छात्र राजनीति से लेकर आठ बार विधायक बनने तक का शानदार सफर तय किया है।
- Written By: अक्षय साहू

डीके शिवकुमार (सोर्स- सोशल मीडिया)
DK Shivakumar Birthday: भारतीय राजनीति के हर दौर में एक नेता ऐसे जरूर रहें जो, न सिर्फ चुनाव अपनी पार्टी को जीत दिलाते हैं बल्कि बड़े-बड़े संकट के समय अपनी राजनीति चाल से सबकों हैरान कर देते हैं। दिग्विजय सिंह, अमित शाह, प्रमोद महाजन ऐसे ही कुछ नाम है। इन्ही नामों एक नाम डोड्डालहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार यानी डीके शिवकुमार का भी है। जो कभी खरीद फरोखत से विधायकों को बचाने के लिए चुपके से बेंगलुरु ले आते हैं तो कभी सिर्फ पार्टी को टूटन से बचाने के लिए मुख्यमंत्री पद से भी समझौता कर लेते है।
डीके शिवकुमार का जन्म 15 मई 1962 को कर्नाटक के कनकापुरा के पास एक छोटे से गांव डोड्डालहल्ली में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता खेती करते थे औन उनकी मां घर संभालती थी। शिवकुमार बपचन से लोगों के सामने बोलने काफी सहज थे। लेकिन उन्हें खुद कभी नहीं सोचा था कि वो राजनीति में आएंगे। राजनीति में उनकी दिलचस्पी तब जागी जब वो कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए बेंगलुरु आए।
दिग्गज नेता के सामने लड़ा पहला चुनाव
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान डीके शिवकुमार राजनीति में सक्रिय हो गए और उन्होंने कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) से जुड़ गए। बोलने में तेज और लोगों को साथ जोड़ने में माहिर शिवकुमार की पहचान जल्द ही छात्र राजनीति का एक बड़ा हिस्सा बन गए। लेकिन उनकी जिंदगी में एक मोड़ तब आया जब उन्होंने 1985 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सतनूर सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया।
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एचडी देवेगौड़ा के सामने अपना पहला चुनाव लड़े थे डीके शिवकुमार (सोर्स- सोशल मीडिया)
उनके इस फैसले ने हर किसी का ध्यान उनकी ओर खींचा। क्योंकि उनके सामने तब के दिग्गज नेता और आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा थे। ऐसे में सिर्फ 23 के शिवकुमार के लिए यह चुनाव किसी भी सूरत में आसान नहींं था। लेकिन फिर भी उन्होंने अपने राजनीति करियर की शुरूआत के लिए देवेगौड़ा के सामने चुनाव लड़ने को ही चुना। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन अपने साहसिक कदम के चलते डीके शिवकुमार पूरे राज्य में प्रसिद्ध हो गए। इसके बाद ही लोग उन्हें “सतनूर का शेर” कहने लगे।
1989 में सतनूर से चुनाव जीतकर पहली बार बने विधायक
एचडी देवेगौड़ा चुनाव लड़ने के बाद मिली प्रसिद्ध का डीके शिवकुमार को आगे चलकर फायदा भी मिला। चार साल बाद 1989 हुए चुनाव में शिवकुमार ने एक बार फिर सतनूर से चुनाव में खड़े हुए और एक बड़ी जीत दर्ज की। इसके बाद एक सिलसिला ही चल पड़ा। शिवकुमार ने 1989 के अलावा सतनूर से 1994, 1999, 2004 में चुनाव लड़ा और हर बार उन्हें भारी जीत मिली।
अब तक आठ बार विधायक रह चुके हैं डीके शिवकुमार (सोर्स- सोशल मीडिया)
हालांकि, उन्होंने 2008 में सतनूर सीट छोड़ दी और इसकी जगह कनकापुरा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। जहां भी उन्हें सफलता मिली। तब से वो कनकापुरा से ही चुनाव लड़ रहे हैं। शिवकुमार कुल मिलाकर आठ बार विधायक बन चुकें हैं। इस दैरान उन्होंने कई बड़ी जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं। वो 1999 से 2004 तक एसएम कृष्णा की सरकार में गृह राज्य मंत्री बना। फिलहाल वो सिद्धारमैया की सरकार में उपमुख्यमंत्री होने के साथ बिजली, बड़े उद्योग, बेंगलुरु विकास और जल संसाधन जैसे बड़े-बड़े विभाग संभाल रहे हैं।
कांग्रेस में संकटमोचक की छवि
डीके शिवकुमार को कांग्रेस में फिलहाल संकटमोचक के तौर पर देखा जाता है। उनकी यह पहचान 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद बनी। इस चुनाव में कांग्रेस अपना शानदार प्रदर्शन करते हुए 77 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। जबकि भाजपा 99 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन यह भाजपा के पहले के चुनावी नतीजों से कम था। ऐसे में कांग्रेस को शक हुआ कि भाजपा उनके विधायकों को तोड़ सकती है। ऐसे में पार्टी आलाकमान ने इन विधायकों भाजपा से दूर रखना का जिम्मा शिवकुमार को दिया।
कांग्रेस में डीके शिवकुमार की संकटमोचक की छवि (सोर्स- सोशल मीडिया)
डीके शिवकुमार ने सबसे पहले पहले 44 विधायकों का संपर्क पूरी दुनिया से काट दिया और फिर चुपके से उन विधायकों को गुजरात से बेंगलुरु ले आए। उन्होंने उन विधायकों के अपने घर के पास और सुरक्षित जगहों पर छुपाया। इसके बाद उनके ठिकानों पर ED की रेड पड़ी, उनपर मुकदमें चले और उन्हे कुछ दिनों के लिए जेल में भी रहना पड़ा। लेकिन उन्होंने हर बार मजबूती से वापसी और खुद को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया जो किसी भी स्थिति में टूटता नहीं और मजबूती से खड़ा रहता है।
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टकराव के बाद बने उपमुख्यमंत्री
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 135 सीटें जीत लीं। डीके शिवकुमार ने पूरा जोर लगाकर प्रचार किया था। मुख्यमंत्री पद के लिए वह खुद दावेदार थे और सिद्धारमैया भी। चुनाव जीतने के बाद ही कई दिनों तक मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सस्पेंस रहा। लेकिन बाद में दिल्ली ने सिद्धारमैया के नाम पर मुहर लाई और उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद मिला। हालांकि, कई बार ऐसी खबरें आती रहती हैं कि शिवकुमार सिद्धारमैया को हटाकर खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। लेकिन उन्हें कभी भी सार्वजनिक रूप कभी इसे लेकर कोई बयान नहीं दिया। न ही कभी उनके दूसरी पार्टी में शामिल होने का खबर आई।
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