सीनेटर का शर्मनाक बयान! भारतीयों और चिलकुर बालाजी मंदिर को बनाया निशाना, H1B Visa मुद्दे पर छिड़ा नया विवाद

H1B Visa Controversy: अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम पर कड़ा प्रहार किया है। उनका मानना है कि यह H1B वीजा सिस्टम अमेरिकी युवाओं की नौकरियां छीन रहा है।
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चिलकुर बालाजी मंदिर और अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट (सोर्स-सोशल मीडिया)
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H1B Visa Controversy Senator Remarks: अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम को लेकर एक बहुत ही विवादित बयान दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिका की रोजगार आधारित वीजा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एरिक का आरोप है कि यह पूरी प्रणाली अमेरिकी कामगारों को बहुत भारी नुकसान पहुंचा रही है।

सीनेटर के अनुसार यह वीजा व्यवस्था अमेरिकी मजदूरी को काफी कम करती है। उन्होंने कहा कि यह विदेशी श्रमिकों के लिए एक तरह का 'वीजा कार्टेल' तैयार कर रही है। श्मिट का मानना है कि अमेरिकी कामगारों को इस धांधली भरी व्यवस्था से मुकाबला नहीं करना चाहिए। इस बड़े H1B वीजा विवाद से भारतीय कामगारों में चिंता बढ़ गई है।

सीनेटर श्मिट का चिलकुर बालाजी पर निशाना

अपने तीखे आरोपों के समर्थन में सीनेटर श्मिट ने हैदराबाद के चिलकुर बालाजी मंदिर की तस्वीर साझा की। उन्होंने इस प्रसिद्ध मंदिर को 'वीजा मंदिर' बताकर अमेरिकी वीजा प्रणाली का मजाक उड़ाया। श्मिट ने लिखा कि हजारों लोग अमेरिकी वर्क वीजा पाने के लिए यहां प्रार्थना करते हैं।सीनेटर ने आरोप लगाया कि विदेशी छात्र करदाताओं की मदद से वर्क परमिट पाते हैं। इसके बाद वे एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड के लिए अपना आवेदन करते हैं। श्मिट ने दावा किया कि बड़ी टेक कंपनियां सस्ते विदेशी श्रमिकों को नौकरी देकर अमेरिकियों को पछाड़ रही हैं।

मिडिल क्लास को हो रहा नुकसान

श्मिट का कहना है कि एच-1बी और एल-1 जैसे वीजा प्रोग्राम्स अमेरिकी मिडिल क्लास को कमजोर कर रहे हैं। उनका दावा है कि अमेरिकी सरकार की मदद से भारत में AI ट्रेनिंग पर अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं। नौकरियों में अब योग्यता के बजाय पक्षपात देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक भारत को कुल एच-1बी वीजा मंजूरियों में 70 से 80 फीसदी का बड़ा हिस्सा मिलता है।

वहीं इसके मुकाबले चीन का हिस्सा वीजा में लगभग 12 फीसदी ही रहता है। हैदराबाद के कई मंदिरों में लोग अमेरिकी वीजा की कामना लेकर दर्शन करने जाते हैं। श्मिट ने विदेशी श्रमिकों की बढ़ती संख्या को वीजा कार्टेल करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका के स्थानीय युवाओं के भविष्य के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ है। विदेशी श्रमिकों की वजह से अमेरिका के कामगारों को सही और उचित मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है।

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