
इंजीनियरिंग की आड़ में रची गई थी तबाही की साजिश? 17 साल पुराना राज आया सामने (फोटो- सोशल मीडिया)
Delhi Blast Investigation News: दिल्ली में लालकिले के पास हुए कार धमाके की जांच कर रही इंटेलिजेंस एजेंसियों के हाथ एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी लगी है। धमाके के आरोपी डॉ. उमर नबी के तार फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं, लेकिन जांच में पता चला है कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है। इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है क्योंकि इसी संस्थान से पढ़े छात्र पहले भी देश को दहलाने वाली आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। अब इस यूनिवर्सिटी का पुराना काला सच एक बार फिर सबके सामने आ गया है।
इंडियन मुजाहिदीन का खूंखार आतंकी मिर्जा शादाब बेग भी इसी अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र रह चुका है। उसने साल 2007 में यहां से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। हैरान करने वाली बात यह है कि अपनी पढ़ाई के दौरान ही वह अहमदाबाद में हुए सीरियल धमाकों की साजिश रच रहा था। रिपोर्ट बताती है कि वह पिछले कई सालों से फरार है और सूत्रों के अनुसार उसकी आखिरी लोकेशन अफगानिस्तान में पाई गई थी। दिल्ली धमाके के बाद फरीदाबाद के धौज स्थित यह यूनिवर्सिटी अब फिर से एजेंसियों के रडार पर है।
मिर्जा शादाब बेग सिर्फ एक सदस्य नहीं, बल्कि इंडियन मुजाहिदीन की रीढ़ माना जाता था। अपनी इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग की जानकारी का इस्तेमाल उसने बम बनाने की तकनीक में किया। साल 2008 के जयपुर धमाकों के लिए उसने उडुपी जाकर विस्फोटक जमा किए और रियाज़ व यासीन भटकल को डेटोनेटर और बेयरिंग मुहैया कराए, जिनसे IED तैयार किए गए। वहीं, अहमदाबाद और सूरत धमाकों से करीब 15 दिन पहले ही वह शहर पहुंच गया था। उसने वहां पूरे शहर की रेकी की और तीन टीमों के साथ मिलकर आईईडी फिटिंग, बम तैयार करने और लॉजिस्टिक का काम संभाला था।
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शादाब का नाम 2007 के गोरखपुर सिलसिलेवार धमाकों में भी सामने आया था, जिसमें 6 लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद जब उसके तार आतंकी संगठन से जुड़े तो गोरखपुर पुलिस ने उसकी संपत्ति कुर्क कर ली थी। साल 2008 में इंडियन मुजाहिदीन का नेटवर्क टूटने के बाद से ही वह फरार है। दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और गोरखपुर जैसे शहरों को निशाना बनाने वाले इस आतंकी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। सूत्रों का कहना है कि 2019 में वह आखिरी बार अफगानिस्तान में देखा गया था, लेकिन आज तक वह एजेंसियों की पकड़ में नहीं आ सका है।






