अवैध व्यापार पर शिकंजा, Amazon और Flipkart के विक्रेताओं के 19 परिसरों पर ED की छापेमारी

ED ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों के तहत दो बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ कई शिकायतों पर जांच शुरू की है। पहले भी ऐसी खबरें आई हैं कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) भी ई-कॉमर्स कंपनियों के कथित प्रतिस्पर्धा-विरोधी तरीकों की जांच कर रहा है।
अवैध व्यापार पर शिकंजा, Amazon और Flipkart के विक्रेताओं के 19 परिसरों पर ED की छापेमारी
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नई दिल्ली : वर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी निवेश उल्लंघन जांच के तहत Amazon और Flipkart जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए काम करने वाले कुछ मुख्य विक्रेताओं के परिसरों पर गुरुवार, 7 नवंबर को छापेमारी की है। आधिकारिक सूत्रों ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कार्रवाई के तहत दिल्ली, गुरुग्राम और पंचकूला, हैदराबाद और बेंगलुरु स्थित इन तरजीही विक्रेताओं के कुल 19 परिसरों की तलाशी ली गई है।

ED ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों के तहत दो बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ कई शिकायतों पर जांच शुरू की है। आरोप लगाया गया है कि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं या सेवाओं के बिक्री मूल्य को प्रभावित करके और सभी विक्रेताओं को समान अवसर प्रदान नहीं करके भारत के एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।

पहले भी ऐसी खबरें आई हैं कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) भी ई-कॉमर्स कंपनियों के कथित प्रतिस्पर्धा-विरोधी तरीकों की जांच कर रहा है। बता दें, सीसीआई बाजार में सभी क्षेत्रों में निष्पक्ष व्यापार तौर-तरीकों को सुनिश्चित करने के लिए काम करता है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और खुदरा मोबाइल विक्रेताओं के संगठन AIAMR ने भी कुछ समय पहले सीसीआई में याचिका दायर कर फ्लिपकार्ट और अमेजन के परिचालन को तत्काल निलंबित करने की मांग की थी, क्योंकि उनका आरोप था कि ये कंपनियां उत्पादों पर भारी छूट देकर कारोबार को प्रभावित करती हैं।

उन्होंने कहा कि बिक्री के इन तौर तरीकों के कारण मोबाइल फोन का ऐसा बाजार तैयार हो रहा है, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है, क्योंकि इस तरह के बाजार में शामिल कंपनियां करों की चोरी करती हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल में यही चिंता जताई थी और उन्होंने भारत में एक अरब डॉलर के निवेश की अमेजन की घोषणा पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि अमेरिकी खुदरा विक्रेता कंपनी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कोई बड़ी सेवा नहीं कर रही है, बल्कि देश में उसे जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कर रही है।

उन्होंने अगस्त में कहा था कि भारत में उनका भारी घाटा हेरफेर कर कम कीमत रखकर बाजार पर एकाधिकार बनाने का संकेत देता है, जो देश के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि इससे करोड़ों छोटे खुदरा विक्रेता प्रभावित होते हैं। मंत्री ने कहा था कि देश में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन खुदरा व्यापार के साथ, ‘‘क्या हम ई-कॉमर्स के इस व्यापक विकास के साथ भारी सामाजिक व्यवधान पैदा करने जा रहे हैं।''

एजेंसी इनपुट के साथ।

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