
च्युइंग चबाते खिलाड़ी।
Why Athletes Chewing Gum: खेल मैदान में खिलाड़ियों को च्यूइंग गम चबाते देखना मामूली आदत लगती है। मगर, इसके पीछे दिमागी फोकस, तनाव नियंत्रण और बेहतर परफॉर्मेंस का विज्ञान छिपा है। हाल के शोध और विशेषज्ञ बताते हैं कि च्यूइंग गम न सिर्फ मूड स्थिर रखती है, बल्कि दिमाग को सजग भी बनाती है। यही कारण है कि अब यह केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रही स्टूडेंट्स, ड्राइवर और कॉर्पोरेट प्रोफेशनल तक इसे फोकस टूल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
कई रिसर्च में पता चला है कि रिदमिक ढंग से चबाने की क्रिया दिमाग में रिलैक्सेशन से जुड़े हिस्सों को सक्रिय करती है, जिससे तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर धीरे-धीरे गिरने लगता है। लगातार चबाने से दिमाग को सुरक्षा का संकेत मिलता है। व्यक्ति खुद को ज्यादा संतुलित महसूस करता है। मिंट वाली गम की हल्की सुगंध दिमाग पर ग्राउंडिंग इफेक्ट डालती है। इससे बेचैनी कम होती है। लंबे पढ़ाई सत्रों या केंद्रित कामों के दौरान यह दिमाग को शांत रखने में मदद करती है। वह भी चाय-कॉफी या किसी सप्लीमेंट के बिना।
एक वायरल वीडियो में फिटनेस कोच गुरजीत कौर ने बता रही हैं कि मैच के दौरान खिलाड़ी गम क्यों चबाते हैं। उनकी बातें स्पोर्ट्स साइंस भी सही साबित करती है। गम चबाने से कॉर्टिसोल कम होता है। इससे खिलाड़ी दबाव में भी संयमित रहते हैं। दिमाग में बढ़ा ब्लड फ्लो रिएक्शन टाइम को तेज करता है। यह लंबे मैचों में मानसिक स्थिरता बनाए रखती है, जिससे फोकस कमजोर नहीं पड़े। नियंत्रित चबाने की लय खिलाड़ी की निर्णय क्षमता और मानसिक सहन शक्ति में सुधार लाती है। कई इसे रिदमिक एंकर मानते हैं। इससे दिमाग और रूटीन मैच के तनाव में संतुलित रहता है।
इस कारण फुटबॉल, क्रिकेट या बास्केटबॉल हर खेल में तनावपूर्ण पलों में खिलाड़ियों के जबड़े अक्सर एक लय में चलते दिख जाते हैं।
च्यूइंग गम अब स्पोर्ट्स के बाहर एक छोटे, लेकिन प्रभावी मानसिक टूल की तरह जगह बना ली है। पढ़ाई करते समय छात्र अधिक समय तक फोकस बनाए रखते हैं। लंबी ड्राइव में अलर्टनेस बढ़ती है। नींद कम महसूस होती है। यह ऑफिस में रिपोर्ट, एडिटिंग या कंसंट्रेशन वाले कामों में दिमाग को भटकने से रोकती है। इंटरव्यू, प्रेजेंटेशन जैसी तनावपूर्ण स्थितियों में मानसिक संतुलन देती है।
च्यूइंग गम ऐसी चीज है, जिसे जेब में रखकर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह हल्का-सा मानसिक स्पष्टता का एहसास देती है। चबाने की लय थकान के समय दिमाग को स्थिर रखती है। तनाव में बेमतलब खाने की आदत भी कम करती है। ग्राउंडिंग टेक्नीक की तरह काम कर बेचैनी को कंट्रोल करती है।
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भले आपको च्यूइंग गम चबाना एक साधारण-सी आदत लगे, लेकिन इसमें दिमाग और शरीर को फायदा पहुंचाने की क्षमता है। खिलाड़ी या छात्र, ड्राइवर हों या ऑफिस प्रोफेशनल हर कोई इसे शांत दिमाग, बेहतर फोकस के आसान उपाय के रूप में अपना रहा है। आप भी अपने दिन में थोड़ी-सी मानसिक स्पष्टता और स्थिरता जोड़ना चाहते हैं तो च्यूइंग गम सरल और असरदार साथी साबित हो सकती है।






