UPSC को लेटरल एंट्री विज्ञापन रद्द करने का केंद्र सरकार ने दिया आदेश, PM मोदी ने बदला अपना फैसला

केंद्र सरकार का UPSC लेटरल इंट्री रद्द करने का आदेश आया है। ये फैसला PM मोदी के आदेश पर बदला गया है। संदर्भ में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूपीएससी चेयरमैन को चिठ्ठी लिखी है।
केंद्र सरकार का UPSC लेटरल इंट्री रद्द करने का आदेश, PM मोदी के आदेश पर फैसला बदला
UPSC lateral entry पर बदला फैसला
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार की ओर से UPSC लेटरल एंट्री के विज्ञापन को रद्द करने का आदेश आया है। ये फैसला PM मोदी के आदेश पर लिया गया है। इसके लिए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूपीएससी यानी संघ लोकसेवा आयोग के चेयरमैन को चिठ्ठी लिखी है।

केंद्रीय कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने UPSC चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर सीधी भर्ती यानी लेटरल एंट्री के विज्ञापन पर रोक लगाई जाए। मंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने यह फैसला लेटरल एंट्री के व्यापक पुनर्मूल्यांकन के तहत लिया है।

क्यों लिया गया फैसला पत्र में कहा गया कि अधिकतर लेटरल एंट्री 2014 से पहले की थी और इन्हें एडहॉक स्तर पर किया गया था। केंद्रीय कार्मिक मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का विश्वास है कि लेटरल एंट्री हमारे संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के समान होनी चाहिए। खासकर आरक्षण के प्रावधानों के संबंध में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

ताजा विवाद क्या है

दरअसल, यूपीएससी ने कई सरकारी विभागों में विशेषज्ञों की भर्ती के वास्ते 45 पदों के लिए शनिवार को विज्ञापन दिया था। इन पदों में 10 संयुक्त सचिव और 35 निदेशक और उप सचिव के पद हैं। इन पदों को अनुबंध के आधार पर लेटरल एंट्री के माध्यम से भरा जाना है। लेटरल एंट्री के फैसले की विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की और दावा किया कि इससे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण के अधिकार कमजोर होंगे। इसी पर विपक्षियों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

लेटरल एंट्री को लेकर राहुल गांधी का आरोप

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के बजाय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के माध्यम से लोक सेवकों की भर्ती करके संविधान पर हमला कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से 45 विशेषज्ञों की विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों में संयुक्त सचिव, निदेशक और उपसचिव जैसे प्रमुख पदों पर नियुक्ति करने की घोषणा की है।

आमतौर पर ऐसे पदों पर अखिल भारतीय सेवाओं-भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFoS) और अन्य ग्रुप ए सेवाओं के अधिकारी तैनात किए जाते हैं।

 क्या है UPSC लेटरल एंट्री

लेटरल एंट्री का कॉन्सेप्ट किसी विभाग में उस क्षेत्र के एक्सपर्ट की नियुक्ति से जुड़ी है। जिन्हें आईएएस जैसी परीक्षा नहीं देनी होती है और उनकी नियुक्ति सीधे तौर पर होती है। वो इसलिए वे संबंधित विषय या विभाग के एक्सपर्ट होते हैं। इसलिए उनके पास पर्याप्त शिक्षा और विशेषज्ञता होती है। साथ ही ये एक्सपर्ट अनुभवी व्यक्ति होते हैं और इनकी नियुक्ति काॅन्ट्रैक्ट पर होती है। जो कि बेहद अल्प समय के लिए होती है। महज तीन से पांच साल के लिए होती है। इसमें चयन का माध्यम इंटरव्यू है।

कब हुई थी लेटरल एंट्री की शुरुआत

ब्यूरोक्रेसी में लेटरल एंट्री का काॅन्सेप्ट सबसे पहले कांग्रेस सरकार के दौरान सामने आया था। इसके बाद 2017 में नीति आयोग ने अपने तीन साल के एजेंडे में इसे जगह दी और 2018 में नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार लेटरल एंट्री के लिए आवेदन मांगा गया, जिसमें ये बताया गया कि लेटरल एंट्री तीन से पांच साल तक के काॅन्ट्रैक्ट पर होगी।

उस समय सिर्फ ज्वाइंट सेक्रेटरी के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगा गया था। हालांकि देश में अबतक कुल 63 नियुक्तियां लेटरल एंट्री के जरिए हुई हैं। जिसमें से 57 अभी भी देश भर में कार्यरत हैं।

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