
वर्धा न्यूज
District Conviction Rate Report 2025: विविध अपराधों में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण की जांच के बाद न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जाती है, किंतु कई बार तकनीकी खामियों अथवा अन्य कारणों से पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हो पाते। ऐसे मामलों में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया जाता है, जबकि कुछ प्रकरणों में आरोपियों को सजा भी सुनाई जाती है।
जिले में वर्ष 2024 में दोषसिद्धि का कुल प्रतिशत 66.54 रहा था, जबकि वर्ष 2025 में यह घटकर 59.90 प्रतिशत पर आ गया है। इस प्रकार गत वर्ष की तुलना में चालू वर्ष में दोषसिद्धि दर में कमी दर्ज की गई है। पुलिस विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में सत्र न्यायालय द्वारा कुल 296 निर्णय सुनाए गए, जिनमें 95 मामलों में सजा हुई। यह प्रतिशत 32.09 रहा।
वहीं प्रथम वर्ग न्यायालय ने भादंवि/भान्यास के अंतर्गत कुल 4,328 निर्णय दिए, जिनमें से 3,622 प्रकरणों में सजा सुनाई गई। इसका प्रतिशत 83.22 रहा। इसके अतिरिक्त, विशेष स्थानीय अपराधों से जुड़े 3,312 मामलों में निर्णय दिए गए, जिनमें 1,564 प्रकरणों में सजा सुनाई गई, जो 47.22 प्रतिशत रहा। इस प्रकार वर्ष 2024 में कुल 7,936 प्रकरणों में न्यायालय ने निर्णय सुनाए, जिनमें से 5,281 मामलों में सजा हुई। कुल दोषसिद्धि प्रतिशत 66.54 दर्ज किया गया।
वर्ष 2025 में नवंबर माह के अंत तक सत्र न्यायालय ने कुल 195 निर्णय सुनाए, जिनमें 59 मामलों में सजा सुनाई गई। यह प्रतिशत 30.26 रहा। प्रथम वर्ग न्यायालय ने भादंवि/भान्यास के अंतर्गत 3,664 निर्णय दिए, जिनमें से 3,042 मामलों में सजा हुई। इसका प्रतिशत 83.02 दर्ज किया गया।
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इसके अलावा विशेष स्थानीय कानूनों के तहत 2,109 प्रकरणों में निर्णय सुनाए गए, जिनमें केवल 474 मामलों में सजा हो सकी। इसका प्रतिशत 22.48 रहा। इस प्रकार वर्ष 2025 में कुल 5,968 प्रकरणों में निर्णय हुए, जिनमें से 3,568 मामलों में सजा सुनाई गई। कुल दोषसिद्धि प्रतिशत 59.90 रहा।
उल्लेखनीय है कि जिले में शराबबंदी लागू होने के बावजूद बड़ी मात्रा में अवैध शराब की बिक्री जारी है। शराब भट्टियां संचालित हो रही हैं तथा शराब तस्कर और विक्रेताओं के खिलाफ वर्धा पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसके बावजूद कई मामलों में न्यायालय में दोषसिद्धि नहीं हो पाती।
इसी प्रकार की स्थिति रेत तस्करी एवं अन्य अपराधों में भी देखने को मिल रही है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। ऐसे आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि का दर बढ़ाना पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है






