
वोटर आईडी (फोटो-सोशल मीडिया)
Voter ID card expenditure fund: केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत के विशाल लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने के लिए अहम वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। देश में मतदाताओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने विधि मंत्रालय के बजट में मतदाता पहचान पत्रों (Voter ID Cards) और चुनाव संबंधी खर्चों के लिए विशेष धनराशि आवंटित की है।
सरकार ने संशोधित अनुमानों के तहत मतदाता फोटो पहचान पत्रों (EPIC) के निर्माण और वितरण के लिए ₹250 करोड़ की राशि तय की है। गौरतलब है कि इससे पहले बजट अनुमानों में यह राशि ₹300 करोड़ प्रस्तावित की गई थी। भारत में वर्तमान में मतदाताओं की संख्या लगभग 99 करोड़ तक पहुंच गई है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा मतदाता आधार बनाती है।
वोटर आईडी कार्ड पर होने वाले खर्च का एक विशेष नियम है। नियम के अनुसार, पहचान पत्रों पर होने वाला कुल खर्च केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बराबर (50:50) बांटा जाता है। प्रत्येक राज्य अपनी मतदाता संख्या के अनुपात में इस राशि का भुगतान करता है।
विधि मंत्रालय, जो निर्वाचन आयोग और चुनाव कानूनों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है, उसे वर्ष 2024 में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों के बकाया खर्चों को निपटाने के लिए ₹500 करोड़ अतिरिक्त दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, चुनाव के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों, राज्य सरकारों और अन्य विभागों द्वारा किए गए खर्चों की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) के लिए यह फंड उपलब्ध कराया जाता है।
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विधि मंत्रालय न केवल बजट आवंटन का प्रबंधन करता है, बल्कि यह चुनाव कानूनों, नियमों और चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों से संबंधित प्रक्रियाओं की निगरानी भी करता है। बजट में की गई यह बढ़ोतरी सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनावों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यों में कोई वित्तीय बाधा न आए। यह आवंटन डिजिटल वोटर आईडी कार्ड्स और सुरक्षा विशेषताओं से लैस नए पहचान पत्रों की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।






