
बीजेपी-सीपीसी बैठक, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
China Communist Party Delhi Visit: भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव के बीच दिल्ली से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन (CPC) के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार और मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शीर्ष नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन मुलाकातों की तस्वीरें सामने आने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
सोमवार देर शाम सीपीसी का प्रतिनिधिमंडल भाजपा के दिल्ली स्थित मुख्यालय पहुंचा। इस दल का नेतृत्व सीपीसी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सन हयान कर रही थीं। उनके साथ भारत में चीन के राजदूत शु फीहोंग भी मौजूद थे। भाजपा की ओर से पार्टी महासचिव अरुण सिंह और विदेश विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। चौथाईवाले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि बैठक के दौरान दोनों दलों के बीच ‘अंतर-दलीय संवाद’ को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मंगलवार को इस प्रतिनिधिमंडल ने संघ मुख्यालय का दौरा किया और आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले से मुलाकात की। जानकारी के अनुसार, यह मुलाकात लगभग 30 मिनट तक चली। हालांकि, संघ के सूत्रों ने इसे महज एक ‘सौजन्य मुलाकात’ बताया है। सूत्रों का कहना है कि चीनी नेताओं ने स्वयं मिलने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद यह बैठक आयोजित की गई।
इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा और आरएसएस को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर बैठक की फोटो शेयर करते हुए सवाल किया, ‘यह रिश्ता क्या कहलाता है?’ श्रीनेत ने आरोप लगाया कि एक तरफ चीन लद्दाख में अतिक्रमण कर बैठा है और अरुणाचल में गांव बसा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा नेता उनके साथ बैठकें कर रहे हैं।
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कांग्रेस प्रवक्ता ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी जिक्र किया और कहा कि उस दौरान चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया था। उन्होंने गलवान में भारतीय जवानों की शहादत का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि क्या भाजपा और चीन के बीच कोई ‘गुप्त समझौता’ हुआ है और भाजपा ने देशद्रोह क्यों किया?
सत्ताधारी दल के अनुसार, यह दौरा दोनों देशों के प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच संचार और आपसी तालमेल बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, विपक्ष के कड़े तेवरों ने इस कूटनीतिक मुलाकात को एक बड़े घरेलू राजनीतिक विवाद में बदल दिया है।






