Assam UCC Bill: असम की हिमंत सरकार ने विधानसभा में पेश किया UCC बिल तो भड़के ओवैसी, बोले- हिंदू कानून...

असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने सोमवार को विधानसभा में Uniform Civil Code (UCC) Bill पेश किया है। जिसके बाद ओवैसी ने इसका जमकर विरोध किया और कहा कि मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपा जा रहा है।
Assam UCC Bill: As Assam's Himanta government tables the UCC Bill in the Assembly, Owaisi lashes out, stating—"Hindu Law..."
Himanta Biswa Sarma – Owaisi ( souce- social media)
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Asaduddin Owaisi on UCC Bill: सोमवार को जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) Assam UCC Bill पेश किया तो यह ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को नागवार गुजरी और उन्होंने इस समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को 'परोक्ष प्रयास' बताते हुए कहा कि मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपा जा रहा है।

हैदराबाद से सांसद सदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडया प्लेटफार्म 'एक्स' पर लिखा, ' असम का यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल्कुल भी एक जैसा नहीं है। यह आदिवासी समुदायों को UCC के दायरे से पूरी तरह बाहर रखता है।' ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा कि अनुच्छेद 29 के तहत हर समुदाय को अपनी संस्कृति की रक्षा करने का अधिकार है, लेकिन सिर्फ़ आदिवासियों की स्वायत्तता की ही रक्षा क्यों की जा रही है?

मुसलमानों पर थोपा जा रहा हिंदू कानून

AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह एक ऐसा कानून है जो थोपा जा रहा है.. उन्होंने कहा, इस्लाम में, कोई भी किसी वारिस को विरासत से वंचित नहीं कर सकता। कोई भी ऐसी वसीयत नहीं लिख सकता जिससे अपनी पूरी संपत्ति सिर्फ़ एक बेटे को दे दी जाए या बेटी को विरासत से वंचित कर दिया जाए। यह UCC किसी को भी वसीयत लिखने और अपनी बेटियों को उनके उचित हिस्से से वंचित करने की अनुमति देता है। यह कानून लैंगिक न्याय से कोसों दूर है।'

Assam UCC Bill में क्या है खास?

दरअसल असम सरकार ने सोमवार (25 मई) को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पेश किया जिसके अनुसार बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का प्रावधान है। हालांकि Assam UCC Bill असम में निवास करने वाली किसी भी अनुसूचित जनजाति (एसटी) पर लागू नहीं होगा।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंध से संबंधित कानूनों को एकीकृत और सरल बनाना है। विधेयक में विवाह और तलाक के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का भी प्रस्ताव है जो पति-पत्नी के लिए भरण-पोषण, विरासत और अन्य कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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