सपा-TMC के बाद आप भी JPC से बाहर, मंत्रियों की गिरफ्तारी वाले बिल पर विपक्ष काट रहा कन्नी

AAP ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने वाले विधेयकों की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का बहिष्कार किया है। इससे पहले TMC और समाजवादी पार्टी भी इससे बाहर रह चुकी हैं।
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सपा-TMC के बाद AAP भी JPC से बाहर
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PM-CM Bill JPC Controversy: लोकसभा में पेश हुए विवादित विधेयकों को लेकर विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच टकराव तेज हो गया है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने से जुड़े बिलों की जांच के लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को अब आम आदमी पार्टी ने भी खारिज कर दिया है। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस समिति से बाहर रह चुकी हैं। आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विपक्षी नेताओं को फंसाना और उनकी सरकारों को गिराना है।

इन विवादित विधेयकों में यह प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री गंभीर आरोपों में 30 दिन तक गिरफ्तार रहता है, तो उसे पद से हटाया जा सकेगा। 20 अगस्त को लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने ये तीन विधेयक पेश किए केंद्रशासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2025, संविधान 130वां संशोधन विधेयक 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक 2025। इन बिलों पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ, विपक्ष ने प्रतियां फाड़ दीं थी और सत्ता पक्ष के साथ इस पर तीखी नोकझोंक हुई थी।

AAP ने क्यों किया बहिष्कार

आप सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भ्रष्टाचार के आरोप झेलने वाली सरकार पारदर्शिता के नाम पर बिल ला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका असली मकसद विपक्षी नेताओं को झूठे मामलों में फंसाना और उनकी सरकारें गिराना है। संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी जेपीसी में शामिल नहीं होंगे।

टीएमसी और सपा का भी सख्त रुख

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस ने समिति को “फर्जी और बेमानी” बताते हुए इसमें हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। पार्टी नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि समिति भाजपा बहुमत के कारण पक्षपाती है। समाजवादी पार्टी ने भी संकेत दिए कि वह इसमें शामिल नहीं होगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह समिति सिर्फ विपक्ष की आवाज दबाने का तरीका है।

विधेयकों को जांच के लिए 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्यों वाली जेपीसी के पास भेजा गया है, जो अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में देगी। सरकार का कहना है कि ये बिल जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि भाजपा इसका राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।

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