पूर्व जजों से लेकर राजदूतों तक, 272 हस्तियों ने राहुल गांधी को भेजा खुला खत; लिखी ऐसी बात कि...!

Former Judges Letter To Rahul Gandhi: पूर्व भारतीय न्यायाधीशों और पूर्व नौकरशाहों ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधा है। 200 से ज्यादा सदस्यों वाले इस समूह ने राहुल को खुला खत भेजा है।
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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Rahul Gandhi: पूर्व भारतीय न्यायाधीशों और पूर्व नौकरशाहों ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधा है। 200 से ज़्यादा सदस्यों वाले इस समूह ने कांग्रेस सांसद द्वारा भारत के चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों पर अपनी नाराज़गी जताई है। पत्र में कहा गया है कि राजनीतिक हताशा को छिपाने के लिए संस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया था।

पत्र में कहा गया है कि हम समाज के वरिष्ठ नागरिकों के रूप में, इस बात पर चिंता व्यक्त करते हैं कि भारत के लोकतंत्र पर हमला हो रहा है। यह हमला बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संस्थाओं के खिलाफ ज़हरीली बयानबाजी के ज़रिए किया जा रहा है। कुछ राजनेता अपनी नाटकीय राजनीतिक रणनीति के तहत बिना कोई वास्तविक नीतिगत विकल्प पेश किए उकसावे और निराधार आरोपों का सहारा ले रहे हैं।"

किन हस्तियों ने राहुल को लिखा पत्र

इस पत्र पर 272 लोगों के हस्ताक्षर थे, जिनमें 16 सेवानिवृत्त न्यायाधीश, 123 पूर्व नौकरशाह, 133 सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी और 14 पूर्व राजदूत शामिल हैं। फिलहाल अभी तक इस पत्र पर राहुल गांधी या फिर कांग्रेस के किसी अन्य नेता की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पत्र में कहा गया है कि भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और उपलब्धियों पर सवाल उठाकर, न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर, और संसद व उसके अधिकारियों पर सवाल उठाकर उनकी छवि धूमिल करने के बाद, अब भारत के चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा और ईमानदारी पर षडयंत्रकारी हमलों का सामना करने की बारी है।

राहुल को मिले लेटर में क्या कुछ है?

पत्र में राहुल गांधी का ज़िक्र है, जिन्होंने बार-बार चुनाव आयोग पर हमला किया है और दावा किया है कि उनके पास वोट चोरी में आयोग की संलिप्तता के सबूत हैं। समूह लिखता है "आरोपों के बावजूद उन्होंने कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।" इसमें आगे कहा गया है कि कांग्रेस और अन्य दलों के कई वरिष्ठ नेता, वामपंथी गैर-सरकारी संगठन और कुछ ध्यान आकर्षित करने वाले लोग SIR के खिलाफ इस बयानबाजी में शामिल हो गए हैं।"

'राजनैतिक हताशा छिपाने का प्रयास'

खत में लिखा गया है, "यहां तक कहा गया है कि आयोग बेशर्मी से भाजपा की बी-टीम की तरह काम कर रहा है।" ऐसी बयानबाजी भावनात्मक रूप से प्रभावशाली हो सकती है, लेकिन यह जांच में टिक नहीं पाएगी क्योंकि चुनाव आयोग ने SIR की कार्यप्रणाली को सार्वजनिक रूप से साझा किया है, अदालत द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार इसकी निगरानी की है, अयोग्य नामों को हटाया है और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा है। इससे पता चलता है कि ये आरोप संस्थागत संकट की आड़ में राजनीतिक हताशा को छिपाने का एक प्रयास मात्र हैं।

पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस नेताओं के व्यवहार को बार-बार चुनावी असफलताओं और हताशा से उपजे गुस्से के कारण माना जा सकता है। इसमें कहा गया है, "जब राजनेता आम नागरिकों की आकांक्षाओं को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, तो वे अपनी विश्वसनीयता फिर से बनाने के बजाय संस्थाओं पर अपना गुस्सा निकालते हैं।

लेटर में में लिखा गया है कि जब विश्लेषण की जगह नाटकीयता आ जाती है तो जनसेवा एक तमाशा बन जाती है। विडंबना यह है कि जिन कुछ राज्यों में विपक्षी दलों के नेतृत्व वाली पार्टियां सरकार बनाती हैं, वहाँ चुनाव आयोग की आलोचना बंद हो जाती है। जब कुछ राज्यों में नतीजे उनके अनुकूल नहीं होते, तो आयोग खलनायक बन जाता है।"

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