Women at 40: 40 की उम्र के बाद महिलाओं को पसंद आ रहा है ‘Slow Life’, सुकून को दे रही प्राथमिकता, जानें क्यों?
Women After 40+: 40 की उम्र के बाद महिलाओं की सुंदरता कम हो जाती है। चिंता करना, कॉम्पेटेटिव और तनावपूर्ण माहौल में रहना, ये सभी कारक धीरे-धीरे एक महिला के आकर्षण और मन की शांति को छीन लेते हैं।
- Written By: रीता राय सागर
(फोटो- सोशल मीडिया)
Body Changes at 40 In Women: सालों से महिलाओं के लिए सफलता का मतलब उनके त्याग को माना जाता रहा है। भरे हुए कैलेंडर, हर वक्त अवेलेबल होना, नींद की कमी और बिना कुछ कहें सब कुछ संभाल लेना औरतों के सक्सेस का पैमाना माना जाता रहा है।
लेकिन अब समय बदल गया है। महिलाएं सबके साथ खुद को भी तवज्जो देने में यकीन करने लगी हैं। 40 और 50 की उम्र में कदम रख रही कई महिलाओं के लिए जीवन जीने के तौर-तरीके बदल रहे हैं।
अर्बन इंडिया में, ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएँ हसल कल्चर यानी लगातार भाग-दौड़ वाली ज़िंदगी से दूर हो रही हैं। 40 पार की महिलाएं शांति और सुकून के साथ शरीर, मन और अपने मेंटल हेल्थ के लिए काम कर रही हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 40 की उम्र के आसपास महिलाओं के शरीर में भी कई बदलाव आते हैं। पेरिमेनोपॉज और हार्मोन से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
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40 के बाद आने वाले बदलाव
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पीरियड्स का अनियमित होना
40 के बाद पीरियड साइकिल अक्सर बिगड़ने लगता है। कभी ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती है, तो कभी बहुत कम। यह दरअसल मेनोपॉज की शुरूआत होती है, जिसे पेरिमेनोपॉज कहा जाता है। यह बेहद आम बात है, लेकिन इस दौरान शरीर मूड स्विंग, हॉट फ्लशेज व नींद की कमी जैसी कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
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हड्डियों का कमजोर होना
एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण हड्डियों की डेसिंटी घटने लगती है। इससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि इस समय कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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त्वचा और बालों पर असर
शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण त्वचा रूखी होने लगती है और उस पर झुर्रियां नजर आने लगती हैं। इसके अलावा, बालों का झड़ना व पतला होने जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।
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मूड स्विंग्स
इस दौरान मेंटल हेल्थ सबसे अधिक प्रभावित होती है। बहुत सी महिलाएं तनाव, चिड़चिड़ापन, घबराहट व नींद की कमी से जूझती हैं।
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थायरॉइड
इस उम्र में थायरॉइड की समस्या बढ़ जाती है। इसके लक्षणों में हर समय थकान महसूस होना, अचानक वजन बढ़ना और बालों का झड़ना शामिल हो सकता है।
जिन कामों को 32 की उम्र में करना बाएं हाथ का खेल लगता था, अब वो मुश्किल लगने लगता है। शरीर में होने वाले ये बदलाव जैसे- नींद में रुकावट, दिमाग में धुंधलापन, एंग्जायटी, सूजन और इमोशनल थकावट पैदा कर देता है।
क्या कहता है आयुर्वेद
आयुर्वेद ने सदियों पहले ही जीवन के इस दौर को पहचान लिया था। तब जब बर्नआउट या हार्मोनल वेलनेस जैसे शब्द चलन में नहीं थे। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ के अनुसार, 40 की उम्र के बाद के जीवन पर वात (Vata) का प्रभाव अधिक होता है। जब लंबे समय तक तनाव, अनियमित दिनचर्या और अधिक वर्कलोड की वजह से वात बढ़ जाता है, तो यह चिंता, नींद न आना, त्वचा का रूखापन, जोड़ों में दर्द, थकान और इमोशनल इंबैलेंस के रूप में सामने आता है।
स्लो लाइफ या हाइ पेस लाइफ
भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर हो रही महिलाएं जरूरी नहीं कि अपना करियर ही छोड़ रही हैं। उनमें से कई तो बस अपनी जीवनशैली और काम करने के तरीके को बदल रही हैं। हर वक्त काम और मल्टीटास्किंग की बजाय रिलैक्स वर्किंग कल्चर को अपना रही हैं। अब महिलाएं इसे उम्र का एक पड़ाव भर मान रही हैं।
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किन बातों का रखें ख्याल
40 के बाद महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले या संकेतों को समझने की जरूरत है। सही देखभाल से इसे बहुत अच्छे से मैनेज किया जा सकता है।
- बैलेंस डाइट लें- अपनी डाइट में गुड कोलेस्ट्रॉल औऱ गुड फैट के साथ कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर चीजें भी शामिल करें।
- रोजाना एक्सरसाइज करें- खुद को एक्टिव रखने के लिए रोज वॉक और योग करें।
- भरपूर नींद- हर रात 7 -8 घंटे की अच्छी नींद जरूर लें।
- स्ट्रेस से दूर रहें- स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ध्यान दें और खुद को शांत रखने की कोशिश करें।
- रेगुलर चेकअप- समय-समय पर अपना पूरा हेल्थ चेकअप करवाते रहें, ताकि अपने शरीर के प्रति जागरूक रह सकें।
