
शादी से पहले करवाएं थैलेसीमिया की जांच (सौ. सोशल मीडिया)
World Thalassemia Day 2025: थैलेसीमिया, एक प्रकार की आनुवांशिक बीमारी है जिसमें पीड़ित के शरीर में खून की कमी हो जाती है। खून की कमी की स्थिति में बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है यानि कि, हीमोग्लोबिन का लेवल भी कम हो जाता है। कहते हैं कि, थैलेसीमिया बीमारी की जांच शादी से पहले करवानी चाहिए ऐसा करने से जानकारी मिल जाती है कपल में इस बीमारी के लक्षण है या नहीं। आप तारक मेहता के शौकीन तो होंगे ही इसके ही एक एपिसोड में इस बीमारी को लेकर चर्चा की गई थी। इस बीमारी की वजह से पत्रकार पोपटलाल की शादी टूट जाती है और बीमारी के बारे में बताया गया था। थैलेसीमिया का शादी से क्या नाता है चलिए जान लेते हैं आगे खबर में…
आपको बताते चलें कि, थैलेसीमिया एक प्रकार की आनुवांशिक बीमारी में से एक होती है। यानि अगर माता-पिता में से किसी को इस बीमारी के लक्षण है तो जन्मे बच्चे को थैलेसीमिया हो जाता है। ऐसे समझे तो, यदि माता-पिता दोनों माइनर थैलेसीमिया के मरीज हैं तो उनके बच्चों को यह बीमारी होने की ज्यादा संभावना रहती है। इसीलिए इस बीमारी से होने वाले बच्चे को बचाने के लिए लोगों को शादी के पहले थैलेसीमिया टेस्ट करवाने की आवश्यकता है। कहते हैं कि, इस टेस्ट में अगर दोनों का ही थैलेसीमिया माइनर आए तो उन्हें आपस में शादी नहीं करना चाहिए। यहां पर थैलेसीमिया की जांच से ही जानकारी मिलती है।
कहते हैं कि, थैलेसीमिया नामक बीमारी की जांच करवाना जरूरी होता है तो वहीं पर यह बात सोचते है कि, जांच कहां करवानी चाहिए। थैलेसीमिया माइनर की जांच के लिए प्रदेश के सभी जिला अस्पताल में नि:शुल्क सुविधा है। थैलेसीमिया मेजर के बच्चों के लिए सरकार ने डे केयर सेंटर भी बनवाया है, जहां पर उन्हें नि:शुल्क खून उपलब्ध करवाया जाता है। सरकार थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए पेंशन भी उपलब्ध करवाती है। इसके अलावा थैलेसीमिया मेजर की स्थिति में इलाज के लिए रेगुलर आयरन की गोली लेनी पड़ती है। साथ ही चिलेशन थेरेपी करनी होती है। इसका स्थाई इलाज बोनमैरो ट्रांसप्लांट होता है, यह ज्यादा मुश्किल और महंगा होता है।
आपको बताते चलें कि, इस समस्या में डॉ. भास्कर गुप्ता बताते है कि, थैलेसीमिया बच्चों को माता-पिता से अनुवांशिक तौर पर मिलने वाला ब्लड डिसऑर्डर है। इस रोग के प्रति जागरुकता के अभाव के कारण बच्चों अधिक ग्रसित हो रहे हैं। अगर कपल में दोनों के परिवार में इस प्रकार की स्थिति बनी हो या कोई परिवार का सदस्य थैलेसीमिया से पीड़ित है तो इसके लिए विवाह पूर्व माता-पिता दोनों की रक्त जांच करना चाहिए। गर्भधारण के पूर्व भी विशेषज्ञों की सलाह लेना चाहिए।






