
उबला हुआ काला चना खाते हुए व्यक्ति (सौ. एआई)
Black Gram Benefits: अक्सर हेल्दी खाने के बावजूद हमें कमजोरी और थकान महसूस होती है जो प्रोटीन की कमी और कमजोर मेटाबॉलिज्म का संकेत है। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि काला चना न केवल मांसपेशियों को ताकत देता है बल्कि हार्मोनल संतुलन और स्टेमिना बढ़ाने के लिए एक जादुई आहार है।
भारतीय रसोई में मौजूद काला चना केवल एक अनाज नहीं बल्कि औषधीय गुणों का खजाना है। अक्सर लोग इसे पाचन में भारी मानकर खाने से बचते हैं लेकिन हकीकत इसके उलट है। सही तरीके से खाया जाए तो यह आपकी मांसपेशियों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
भारतीय भोजन में अक्सर फाइबर तो होता है लेकिन प्रोटीन की कमी रह जाती है। काला चना इस कमी को पूरा करने का सबसे सस्ता और प्रभावी स्रोत है। इसमें मौजूद आयरन, प्रोटीन और मैंगनीज मांसपेशियों को मजबूती देते हैं और एनीमिया से लड़ने में मदद करते हैं। खास बात यह है कि इसका लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स इसे मधुमेह के मरीजों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित बनाता है।
आयुर्वेद में काले चने को मांसधातु वर्धक और अग्नि-स्थिर माना गया है। यह शरीर में केवल चर्बी नहीं बढ़ाता बल्कि हड्डियों का घनत्व और सहनशक्ति बढ़ाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पाचन अग्नि को तेज करता है और गट हेल्थ में सुधार लाता है। यह शरीर को तुरंत नहीं बल्कि एक स्थिर शक्ति प्रदान करता है जिससे दिनभर थकान महसूस नहीं होती।
काला चना (सौ. फ्रीपिक)
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गलत तरीके से खाना पड़ सकता है भारी अक्सर लोग काले चने को कच्चा या सिर्फ भिगोकर खाना पसंद करते हैं जो गैस और कब्ज जैसी पेट की समस्याओं का कारण बन सकता है। आयुर्वेद के अनुसार कच्चा चना पाचन में भारी होता है।
एक कटोरी चने को रातभर पानी में भिगो दें। सुबह इन्हें अच्छी तरह उबाल लें।
उबले हुए चनों को हल्के तेल में हींग और जीरे के साथ तड़का लगाकर खाएं। हींग और जीरा चने के वात गुण को कम करते हैं जिससे यह आसानी से पच जाता है और शरीर को पूरा पोषण मिलता है।
वर्कआउट रिकवरी हो या पुरानी कमजोरी काला चना हर समस्या का समाधान है। इसे अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं और 15 दिनों में ही अपने शरीर की ताकत में बदलाव महसूस करें।






