पाकिस्तान में महंगाई का 'महाविस्फोट', पेट्रोल-डीजल के 20% दाम बढ़े; 26वीं बार IMF की शरण में पड़ोसी देश

Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान में अल्पकालिक महंगाई दर में भारी उछाल आया है। पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है, जबकि देश कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है।
Inflation 'Explosion' in Pakistan: Petrol and Diesel Prices Soar by 20%; Neighboring Nation Approaches IMF for the 26th Time
शहबाज शरीफ, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Petrol Price In Pakistan: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश में अल्पकालिक महंगाई का प्रमुख सूचकांक सेंसिटिव प्राइस इंडिकेटर (SPI) 11 मार्च को समाप्त सप्ताह में सालाना आधार पर 6.44 प्रतिशत बढ़ गया है। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) की रिपोर्ट बताती है कि यह सूचकांक पिछले सप्ताह की तुलना में 1.89 प्रतिशत बढ़ा है, जो घरेलू इस्तेमाल की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में आए तेज उछाल को दर्शाता है।

पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में आग

आम जनता के लिए सबसे बड़ा झटका ईंधन की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल की कीमतों में 20.60 प्रतिशत और डीजल में 19.54 प्रतिशत की साप्ताहिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही एलपीजी (LPG) की कीमतों में भी 12.13 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिसने महंगाई को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।

थाली से दूर हुआ राशन

ईंधन के साथ-साथ खाद्य पदार्थों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। एक सप्ताह के भीतर प्याज 9.63 प्रतिशत, केला 1.44 प्रतिशत और गेहूं का आटा 1.28 प्रतिशत महंगा हो गया है। इसके अलावा चिकन, दाल माश, जलावन लकड़ी और दूध जैसी बुनियादी चीजों की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी देखी गई है, जिससे आम आदमी का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।

विदेशी मदद और IMF पर निर्भरता

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी नाजुक है कि वह अब बाहरी मदद और विदेशी प्रेषण (रेमिटेंस) पर पूरी तरह निर्भर हो गया है। पाकिस्तान की जीडीपी में रेमिटेंस की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है जो उसके कुल निर्यात आय के बराबर है। यह निर्भरता देश की बंद पड़ी फैक्ट्रियों, उच्च बेरोजगारी और कम उत्पादन क्षमता जैसी बुनियादी कमजोरियों को छिपा रही है।

आंकड़े बताते हैं कि 1958 से अब तक पाकिस्तान 26 बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है, जो दुनिया में किसी भी देश के लिए सबसे अधिक है। इन कार्यक्रमों के तहत उसे अब तक 34 अरब डॉलर से अधिक की मदद मिल चुकी है। वर्तमान में भी 7 अरब डॉलर का फंड कार्यक्रम 2025-26 तक के लिए बढ़ाया गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 2026 से 2031 के बीच पाकिस्तान पर कर्ज, महंगाई और गरीबी का संकट और भी गहरा सकता है।

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