पैकड फूड (सौ. फ्रीपिक)
Health Tips: आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में ताजा और संतुलित आहार तैयार करना एक चुनौती बन गया है। समय की कमी के कारण लोग घर के खाने के बजाय बाजार में मिलने वाले रेडी-टू-ईट और पैक्ड फूड पर निर्भर होते जा रहे हैं। बाजार इन जरूरतों को भुनाने के लिए हेल्दी, नेचुरल और शुगर-फ्री जैसे लुभावने लेबल्स का सहारा लेता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिन चीजों को आप अपनी सेहत सुधारने के लिए खा रहे हैं वे असल में आपको अंदर से खोखला कर रही हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोसेस्ड हेल्थ फूड का लंबे समय तक सेवन शरीर के मेटाबॉलिज्म को खराब कर गंभीर बीमारियों को दावत दे सकता है।
जूस को फलों का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है लेकिन यह एक बड़ी गलतफहमी है। डिब्बाबंद जूस में स्वाद को बरकरार रखने के लिए कृत्रिम रंग और भारी मात्रा में प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं। वहीं दुकान पर मिलने वाले ताजे जूस में फल का सबसे जरूरी हिस्सा यानी फाइबर निकाल दिया जाता है। बिना फाइबर के जूस पीने से शरीर में ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ जाता है जो लीवर पर दबाव डालता है।
वजन घटाने वालों की पहली पसंद ओट्स होती है, लेकिन बाजार में मिलने वाले 2 मिनट वाले इंस्टेंट ओट्स सेहत के दुश्मन हैं। इन्हें अत्यधिक प्रोसेस किया जाता है और इनमें सोडियम, कृत्रिम फ्लेवर और चीनी की अधिकता होती है। अगर आप ओट्स का असली फायदा चाहते हैं तो स्टील-कट ओट्स या रोल्ड ओट्स का ही चुनाव करें।
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. एआई)
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बाजार में ब्राउन ब्रेड को आटे या मल्टीग्रेन का नाम देकर बेचा जाता है। हकीकत यह है कि अधिकांश ब्राउन ब्रेड में आटे का अंश मात्र 10-20% होता है बाकी हिस्सा मैदा ही होता है। इसे ब्राउन बनाने के लिए इसमें कैरामेल कलर मिलाया जाता है। यह पाचन तंत्र को खराब करने के साथ-साथ वजन बढ़ाने का काम करता है।
दही और लस्सी प्रोबायोटिक्स के अच्छे स्रोत हैं लेकिन जब इसमें मैंगो या स्ट्रॉबेरी जैसे फ्लेवर मिल जाते हैं तो यह मीठी कोल्ड ड्रिंक जैसा हो जाता है। इन पैक्ड डेयरी प्रोडक्ट्स में चीनी की मात्रा एक सामान्य मिठाई से भी ज्यादा हो सकती है। इसके अलावा इन्हें लंबे समय तक चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स आंतों के गुड बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं।
डायबिटीज के मरीज या फिटनेस के प्रति जागरूक लोग शुगर-फ्री बिस्कुट या मिठाइयों की ओर भागते हैं। मेडिकल साइंस के अनुसार शुगर-फ्री जैसी कोई चीज नहीं होती। इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल किया जाता है जो रिफाइंड चीनी से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। हमारा शरीर प्राकृतिक मिठास (जैसे गुड़ या शहद) को भी चीनी की तरह ही प्रोसेस करता है इसलिए शुगर-फ्री के नाम पर अधिक कैलोरी लेना शरीर को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है।
सेहत के नाम पर बिक रहे इन उत्पादों के झांसे में आने के बजाय प्राकृतिक और न्यूनतम प्रोसेस्ड भोजन को प्राथमिकता दें। किसी भी पैकेट को खरीदने से पहले उसके पीछे लिखे Ingredients को ध्यान से पढ़ें। याद रखें जो खाना डिब्बे में बंद है और जिसकी शेल्फ लाइफ महीनों की है वह आपकी लंबी उम्र के लिए अच्छा नहीं हो सकता।