पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने 35 साल पुराने मामले दोषी आईपीएस संजीव भट्ट को जमानत देने से इनकार करते हुए उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दी। इस मामले में भट्ट को गुजरात हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने संजीव भट्ट की जमानत याचिका करते हुए कहा कि मामले में जमानत या सजा के निलंबन संबंधी उनकी याचिका में कोई विशेष बात नहीं है।
न्यायमूर्ति नाथ ने फैसला सुनाते हुए कहा, हम संजीव भट्ट को जमानत देने के पक्ष में नहीं हैं। जमानत की अर्जी खारिज की जाती है। अपील की सुनवाई प्रभावित नहीं होगी। अपील की सुनवाई में तेजी लाई जाती है। आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ भट्ट की अपील फिलहाल शीर्ष अदालत में लंबित है।
भट्ट ने 2024 में गुजरात हाई कोर्ट के 9 जनवरी, 2024 के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उनकी अपील खारिज कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भट्ट और सह-आरोपी प्रवीण सिंह जाला की भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत गुजरात हाई कोर्ट के सुनाए गए फैसले को भी बरकरार रखा है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन पांच अन्य आरोपियों की सजा बढ़ाने का अनुरोध किया गया था जिन्हें हत्या के आरोपों से बरी कर दिया गया था। हालांकि उन्हें धारा 323 और 506 के तहत दोषी ठहराया गया था।
30 अक्टूबर 1990 को, तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव भट्ट ने जाम जोधपुर शहर में एक साम्प्रदायिक दंगे के बाद, करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया था। यह घटना भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी की ‘रथ यात्रा’ को रोकने के खिलाफ ‘बंद’ के दौरान हुआ था। हिरासत में लिए गए लोगों में से एक प्रभुदास वैष्णानी की रिहाई के बाद अस्पताल में मौत हो गई थी।
वैष्णानी के भाई ने तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भट्ट और छह अन्य पुलिस अधिकारियों पर हिरासत में उसे प्रताड़ित करने और उसकी मौत का कारण बनने का आरोप लगाया था।
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भट्ट को 5 सितंबर, 2018 को एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उन पर एक व्यक्ति को मादक पदार्थ रखने के आरोप में झूठा फंसाने का आरोप है। मामले में मुकदमा जारी है। भट्ट 2002 गुजरात दंगा मामलों से जुड़े साक्ष्य के कथित फर्जीवाड़े के एक अन्य मामले में भी आरोपी हैं, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक आर बी श्रीकुमार भी सह-अभियुक्त हैं।