
जुबीन गर्ग (सोर्स- सोशल मीडिया)
Zubeen Garg Birthday Special Story: संगीत जगत में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं, जो सिर्फ सुनी नहीं जातीं बल्कि दिलों में हमेशा के लिए बस जाती हैं। जुबीन गर्ग ऐसी ही एक आवाज थे, भावनाओं से भरी, आत्मा को छू लेने वाली और अलग-अलग भाषाओं में संगीत का नया रंग भरने वाली। बॉलीवुड, असमिया, बंगाली, उड़िया से लेकर तमिल संगीत तक, उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें एक दुर्लभ कलाकार बना दिया।
18 नवंबर 1972 को मेघालय के तुरा में एक असमिया ब्राह्मण परिवार में जन्मे जुबीन का नाम प्रसिद्ध वायलिनवादक जुबिन मेहता से प्रेरित था। उनके माता-पिता चाहते थे कि उनका बेटा भी संगीत की दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल करे और जुबीन ने इस उम्मीद को सच कर दिखाया। पिता मोहन बोरठाकुर मजिस्ट्रेट और मां इली बोरठाकुर एक गायिका थीं।
संगीत की पहली सीख जुबीन गर्ग को अपनी मां से मिली, जिन्होंने उन्हें तबला और संगीत की प्राथमिक शिक्षा दी। सिर्फ तीन साल की उम्र में उन्होंने गाना शुरू कर दिया था। कॉलेज छोड़कर संगीत को अपना जीवन बना लेने वाले जुबीन ने 1990 के दशक की शुरुआत में अपना पहला असमिया एल्बम अनामिका रिकॉर्ड किया। इसके बाद ‘तुमी जुनु परिबा हुन’ और ‘तुमी जुनाकी हुबाख’ जैसे गाने उन्हें असम में लोकप्रियता की नई ऊंचाइयों पर ले गए। ‘जापुनोर जुर’, ‘जुनाकी मोन’, ‘माया’ और ‘आशा’ जैसे एल्बमों ने उन्हें रीजनल स्टार बना दिया।
1995 में वह अपने सपनों के साथ मुंबई पहुंचे और इंडीपॉप एल्बम चांदनी रात से शुरुआत की। इसके बाद ‘जलवा’, ‘युहीं कभी’, ‘जादू’ और ‘स्पर्श’ जैसे एल्बमों ने उनकी पहचान और भी मजबूत की। बॉलीवुड में उन्होंने ‘दिल से’, ‘डोली सजा के रखना’, ‘फिजा’, ‘कांटे’ और ‘गद्दार’ जैसी फिल्मों में अपनी जादुई आवाज का योगदान दिया। महेश भट्ट की फिल्म गैंगस्टर के संगीत ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक सिंगर का सम्मान दिलाया।
हिंदी के अलावा उन्होंने बंगाली, उड़िया, तमिल, भोजपुरी, मराठी समेत 40 से ज्यादा भाषाओं में गाने गाए। वह उन कलाकारों में से थे, जिन्होंने भाषा की सीमाओं को पार कर अपनी आवाज से सबको जोड़ा। 19 सितंबर 2025 को जुबीन गर्ग की मौत की खबर ने संगीत प्रेमियों को झकझोर दिया। सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान डूबने से उनकी मृत्यु बताई गई, हालांकि पूरा मामला एसआईटी जांच के अधीन है। जुबीन गर्ग सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि एक युग थे।






