Haq Netflix Records in Pakistan (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Haq Netflix Records in Pakistan: अभिनेत्री यामी गौतम और इमरान हाशमी की कोर्टरूम ड्रामा फिल्म ‘हक’ (Haq) इन दिनों डिजिटल दुनिया में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सिनेमाघरों में उम्मीद के मुताबिक जादू न चला पाने वाली इस फिल्म ने 2 जनवरी, 2026 को नेटफ्लिक्स पर दस्तक देते ही सफलता की नई परिभाषा लिख दी है। फिल्म की गूंज न केवल भारत में, बल्कि सरहद पार पाकिस्तान और नाइजीरिया में भी जोर-शोर से सुनाई दे रही है।
रिलीज के दूसरे सप्ताह तक 45 लाख से ज्यादा व्यूज बटोरने वाली यह फिल्म पाकिस्तान के नेटफ्लिक्स चार्ट में टॉप पोजीशन पर काबिज हो गई है। फिल्म की कहानी साल 1985 के ऐतिहासिक शाह बानो मामले से प्रेरित है, जिसने दोनों देशों के दर्शकों के दिलों पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। आस्था, परिवार और महिलाओं के अधिकारों पर केंद्रित इस फिल्म ने सरहदों की दीवार को गिराते हुए एक वैश्विक विमर्श छेड़ दिया है।
सुपर्ण एस. वर्मा द्वारा निर्देशित ‘हक’ की कहानी ‘शाजिया’ (यामी गौतम) के इर्द-गिर्द घूमती है। शाजिया अपने पति (इमरान हाशमी) द्वारा दिए गए तलाक के बाद भरण-पोषण (Maintenance) के लिए एक कठिन कानूनी लड़ाई लड़ती है। यह फिल्म एक पितृसत्तात्मक व्यवस्था में न्याय के लिए एक महिला के संघर्ष को दर्शाती है। यामी गौतम के दमदार अभिनय ने शाजिया के दर्द और उसके अटूट हौसले को पर्दे पर बखूबी उतारा है, जिसे देखकर दर्शक भावुक हो रहे हैं।
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पाकिस्तान में ‘हक’ की सफलता ने वहां के समाज और मनोरंजन उद्योग में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। फिल्म के सब्जेक्ट ने विशेष रूप से वहां की महिलाओं को प्रभावित किया है। पाकिस्तानी अभिनेत्री और प्रोड्यूसर फजिला काजी ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “इस फिल्म की भावनात्मक गहराई प्रेरणादायक है, इसने मुझे रुला दिया।” वहीं, वकील और एक्ट्रेस मरियम नूर ने स्थानीय नाटकों की आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय फिल्म ने कुरान और पारिवारिक व्यवस्था को हमारे अपने नाटकों से कहीं बेहतर ढंग से समझाया है।
नेटफ्लिक्स इंडिया पर नंबर 1 से शुरुआत करने वाली ‘हक’ गैर-अंग्रेजी फिल्मों की वैश्विक सूची में तेजी से नंबर 2 पोजीशन पर पहुंच गई है। दर्शकों का कहना है कि यह हाल के वर्षों में बॉलीवुड द्वारा रिलीज की गई सबसे सशक्त फिल्मों में से एक है। एक दर्शक ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हक इस्लाम में तलाक और महिलाओं के आर्थिक अधिकारों के मुद्दे पर बनी एक खूबसूरत फिल्म है। काश समाज में तलाक एक कलंक न होता।” फिल्म के प्रभावी संवाद और कानूनी बारीकियों ने इसे एक ‘मस्ट वॉच’ फिल्म बना दिया है।