The Bengal Files: द बंगाल फाइल्स के लिए इम्पा ने नरेंद्र मोदी से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग

Screening Disrupted: निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म 'द बंगाल फाइल्स' की रिलीज को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। फिल्म के लिए अब भी बाधा उत्पन्न न्न की जा रही है।
The Bengal Files: इम्पा ने नरेंद्र मोदी से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग, 'द बंगाल फाइल्स' की स्क्रीनिंग में आ रही है बाधा
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The Bengal Files Screening Disrupted: पश्चिम बंगाल में फिल्म द बंगाल फाइल्स की स्क्रीनिंग को लेकर बढ़ा उतपन्न हो रही है इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईएमपीपीए) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

आईएमपीपीए का कहना है कि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से वैधानिक मंजूरी मिलने के बावजूद, पश्चिम बंगाल राज्य में इसकी सार्वजनिक प्रदर्शन को रोका जा रहा है।

अप्रत्यक्ष तरीकों से फिल्म के लिए बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं

संगठन का आरोप है कि राज्य सरकार ने फिल्म पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन अप्रत्यक्ष तरीकों से फिल्म की रिलीज में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। पत्र में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में 'द बंगाल फाइल्स' को दर्शकों तक पहुंचने से रोका जा रहा है, जिससे न सिर्फ दर्शकों का अधिकार प्रभावित हो रहा है, बल्कि निर्माता और वितरक भी डर और दबाव का सामना कर रहे हैं।

फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया की वैधता पर सवाल

राज्य सरकार कानून व्यवस्था और आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है, जो कि किसी भी रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए अनिवार्य है। आईएमपीपीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिल्म के निर्माण में भारी निवेश किया गया है, जिसकी भरपाई केवल उसकी स्क्रीनिंग से संभव है। यदि फिल्म की रिलीज में इस तरह की बाधाएं जारी रहीं तो इससे निर्माताओं, वितरकों और संपूर्ण फिल्म उद्योग को गंभीर आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। इस तरह की स्थिति से न केवल कला और सिनेमा के विकास पर असर पड़ेगा, बल्कि यह फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया की वैधता पर भी सवाल खड़े करेगा।

यह सिर्फ एक फिल्म का मामला नहीं

पत्र के आखिर में आईएमपीपीए ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वह इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करें और यह सुनिश्चित करें कि 'द बंगाल फाइल्स' जैसी प्रमाणित फिल्मों को देश के किसी भी हिस्से में निर्बाध रूप से प्रदर्शित किया जा सके। संगठन ने कहा है कि यह सिर्फ एक फिल्म का मामला नहीं है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और रचनात्मकता के सम्मान से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा है।

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