Hormuz Crisis: ग्रीस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका की सैन्य मांग को ठुकराया

Military Coalition Rejection: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य गठबंधन की मांग को ग्रीस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
Hormuz Crisis: Greece, Germany, and Australia Reject US Call for Military Involvement 
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Europe Rejects Military Intervention: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच ग्रीस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने सैन्य हस्तक्षेप से स्पष्ट दूरी बना ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठबंधन की मांग किए जाने के बावजूद इन देशों ने सैन्य हस्तक्षेप को अस्वीकार करने का रुख अपनाया है। इन राष्ट्रों ने स्पष्ट किया है कि वे इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहते और केवल कूटनीतिक प्रयासों का ही दृढ़ता से समर्थन करेंगे। सुरक्षा और आर्थिक चिंताओं के बीच यह फैसला वैश्विक राजनीति में एक बड़े कूटनीतिक बदलाव का स्पष्ट संकेत दे रहा है।

ग्रीस का आधिकारिक रुख

ग्रीस सरकार के प्रवक्ता पावलोस मारिनाकिस ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उनका देश हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने बताया कि ग्रीस की मौजूदा भागीदारी केवल यूरोपीय संघ के ऑपरेशन शील्ड तक सीमित है जो फिलहाल लाल सागर क्षेत्र में सक्रिय है। मारिनाकिस ने जोर देकर कहा कि इस मिशन में केवल ग्रीस और इटली के जहाज शामिल हैं जिनका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की रक्षा करना है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति

ग्रीस का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सार्वभौमिक पालन ही क्षेत्र में स्थिरता लाने का एकमात्र और सबसे प्रभावी कूटनीतिक तरीका है। प्रवक्ता ने कड़े शब्दों में कहा कि उनका देश किसी भी कीमत पर युद्ध में शामिल होने का कोई इरादा नहीं रखता है। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति के उस अनुरोध के बाद आया है जिसमें उन्होंने तेल पर निर्भर देशों से सैन्य गठबंधन की मांग की थी।

जर्मनी का सख्त इनकार

जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भी अमेरिका की सैन्य गठबंधन वाली मांग को सिरे से और पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने बर्लिन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जर्मनी इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा। पिस्टोरियस ने स्पष्ट किया कि सुरक्षित आवागमन के लिए केवल कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया जाएगा और सैन्य हस्तक्षेप की जरूरत पर संदेह है।

नाटो पर ट्रंप की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर नाटो सहयोगी अमेरिका की मदद नहीं करते तो गठबंधन का भविष्य खराब हो सकता है। इस पर पिस्टोरियस ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जर्मनी की लड़ाई नहीं है क्योंकि उन्होंने इस संघर्ष को कभी शुरू नहीं किया। जर्मनी का यह रुख ट्रंप प्रशासन की क्षेत्रीय सुरक्षा योजनाओं के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक तैयारी

ऑस्ट्रेलिया ने भी मध्य-पूर्व के संघर्ष में अपने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है लेकिन आर्थिक संकट से निपटने की तैयारी की है। ऑस्ट्रेलियाई मंत्री कैथरीन किंग ने जानकारी दी कि देश के पास वर्तमान में 37 दिन का पेट्रोल और 30 दिन का डीजल भंडार है। सरकार ने जेट ईंधन के 29 दिनों के भंडार के साथ ईंधन भंडारण के नियमों में अस्थायी रूप से कुछ राहत देने का फैसला किया है।

यात्रियों के लिए सख्त चेतावनी

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एक व्यापक यात्रा चेतावनी जारी की है जिसमें कई खाड़ी देशों का नाम शामिल है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे ईरान, इराक, इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के रास्ते ट्रांजिट यात्रा करने से भी बचें। विदेश मंत्रालय का कहना है कि संघर्ष बढ़ने से उड़ानें अचानक रद्द हो सकती हैं इसलिए एयरपोर्ट से बाहर न निकलने पर भी खतरा रहेगा।

भविष्य की कूटनीतिक राह

सभी प्रमुख सहयोगी देशों द्वारा सैन्य भागीदारी से इनकार करने के बाद अब कूटनीतिक बातचीत के रास्ते ही सबसे महत्वपूर्ण विकल्प बचे हैं। इन देशों का मानना है कि युद्ध की आग को भड़काने के बजाय शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम करना ही क्षेत्र के हित में है। वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए अब नए अंतरराष्ट्रीय समझौतों और सहयोग की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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