ओम पुरी का लोको पायलट बनने का था सपना, किस्मत पलटी और ताउम्र नसीरुद्दीन शाह के 'ऋणी' बन गए

Om Puri लोको पायलट बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत से एक्टिंग में आए। उन्होंने खुद को नसीरुद्दीन शाह का ऋणी बताया। गरीबी से संघर्ष कर सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं बल्कि उन्होंने हॉलीवुड तक का सफर तय किया।
Om Puri Death Anniversary
Om Puri Death Anniversary (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Om Puri Death Anniversary: दिवंगत अभिनेता ओम पुरी की जिंदगी संघर्ष, मेहनत और सफलता की एक अनोखी मिसाल रही है। बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अपनी दमदार अदाकारी से पहचान बनाने वाले इस अभिनेता का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। महज छह साल की उम्र में उन्होंने परिवार की आर्थिक मदद के लिए चाय की दुकान पर बर्तन धोने का काम शुरू कर दिया था।

ओम पुरी ने कभी नहीं सोचा था कि वह अभिनय की दुनिया के इतने चमकते सितारे बनेंगे, क्योंकि उनका बचपन का सपना लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) बनना था। ओम पुरी एक ऐसा नाम है जो मुश्किल हालात में भी लड़कर आगे बढ़ा, लेकिन वह अपनी सफलता का श्रेय और ऋणी हमेशा अपने दोस्त नसीरुद्दीन शाह को मानते थे।

गरीबी और लोको पायलट बनने का सपना

ओम पुरी का जन्म 18 अक्टूबर 1950 को पंजाब के पटियाला जिले में हुआ था। उनका बचपन अभावों से भरा था:

आर्थिक संघर्ष: खेलने-कूदने की उम्र में परिवार को संभालने के लिए उन्होंने चाय की दुकान पर काम किया और बर्तन मांजकर घर चलाने में हाथ बंटाया। इसके अलावा कई छोटे-मोटे काम किए।

ट्रेन से लगाव: उनकी दूसरी पत्नी नंदिता पुरी ने उन पर लिखी किताब 'अनलाइकली हीरो: ओम पुरी' में बताया कि उन्हें ट्रेन से गहरा लगाव था। वह रात में अक्सर रेलवे यार्ड में जाकर किसी ट्रेन में सो जाते थे और बड़ा होकर लोको पायलट बनना चाहते थे।

नसीरुद्दीन शाह से दोस्ती और अभिनय में प्रवेश

हालात कुछ ऐसे बने कि गरीबी से जूझते हुए उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया, जहां उनकी जिंदगी को नया मोड़ मिला:

गहरा रिश्ता: NSD में ही उनकी मुलाकात नसीरुद्दीन शाह से हुई और दोनों के बीच दोस्ती का गहरा रिश्ता बन गया। दोनों ने बाद में पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में भी साथ पढ़ाई की।

ऋणी: ओम पुरी हमेशा नसीरुद्दीन शाह को अपना खास दोस्त और मार्गदर्शक मानते थे। अनुपम खेर के एक शो में उन्होंने कहा था, "मैं नसीर साहब का बहुत ऋणी हूं। मेरे मेंटर कोई भी रहे हों, लेकिन असली अभिनेता बनाने का श्रेय इन्हीं को जाता है। अगर ये मेरे साथ न खड़े होते तो शायद मैं यहां न होता। मैं हमेशा ऋणी रहूंगा।"

फिल्मी करियर और अंतरराष्ट्रीय पहचान

ओम पुरी ने मराठी फिल्म 'घासीराम कोतवाल' से फिल्मी करियर की शुरुआत की।

बड़ी पहचान: उन्हें हिंदी सिनेमा में बड़ी पहचान साल 1980 की क्रांतिकारी फिल्म 'आक्रोश' से मिली, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार मिला।

यादगार फिल्में: उन्होंने 'अर्द्ध सत्य', 'आरोहण', 'जाने भी दो यारों' और 'मालामाल वीकली' जैसी यादगार फिल्मों में शानदार काम किया।

बहुमुखी प्रतिभा: उनकी सबसे बड़ी खासियत थी कि वे छोटे-बड़े हर किरदार में जान डाल देते थे। वह गंभीर और यथार्थवादी भूमिकाओं के लिए मशहूर थे, लेकिन कॉमेडी में भी उन्होंने कमाल दिखाया।

हॉलीवुड में छाप: ओम पुरी ने 'सिटी ऑफ जॉय', 'वुल्फ' और 'द घोस्ट एंड द डार्कनेस' जैसी फिल्मों में काम करके अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी।

कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित ओम पुरी का 6 जनवरी 2017 को 66 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह आज भी युवा कलाकारों के लिए एक महान प्रेरणा बने हुए हैं।

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