चाय मेरे खून में है, परिणीता बोरठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर असम को लेकर कही ये बात

असम में चाय के बागानों से घिरे रहने के कारण एक्ट्रेस परिणीता बोरठाकुर का चाय के प्रति गहरा लगाव है, अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर उन्होंने कहा कि चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं है ये मेरे खून में है।
चाय मेरे खून में है, अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर बोलीं परिणीता बोरठाकुर
परिणीता बोरठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर असम को लेकर कही ये बात
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चाय भले ही अंग्रेजों की देन हो, लेकिन आज यह हमारे लाइफ स्टाइल का हिस्सा बन चुकी है। 21 मई 2025 को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर चाय को लेकर एक्ट्रेस परिणीता बोरठाकुर ने भी कहा है कि चाय उनके लिए सिर्फ एक पेय पदार्थ नहीं है बल्कि वह उससे कहीं ज्यादा है। उन्होंने बताया कि चाय उनकी दिनचर्या का अभिन्न अंग है। चाय के प्रति उनका प्यार दसवीं कक्षा की परीक्षा की तैयारी के समय शुरू हुआ था और वह अब तक बरकरार है। उन्होंने बताया कि वह असम में पली-बढ़ी हैं, इसीलिए चाय के बागानों को उन्होंने देखा है और यह भी एक कारण है कि चाय के प्रति उनका लगाव औरों से ज्यादा है।

एक इंटरव्यू के दौरान परिणीता बोरठाकुर ने बताया कि चाय से वह भावनात्मक तौर पर जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि मैं एक ऐसे परिवार से आती हूं जिसका तेल का व्यापार है और असम के दुलियाजान में मेरा घर है, लेकिन हमारे यहां चाय के प्रति सभी का लगाव है, उन्होंने बताया कि चाय के प्रति उनका प्यार उनके चाचा की बदौलत और भी ज्यादा गहरा हुआ, जो एक चाय बागान के प्रबंधक थे। वह हमेशा उनसे मिलने जाती थी, जहां वह चाय के बागानों के बीच शानदार पल बिताया करती थी।

परिणीता बोरठाकुर ने बताया कि मुंबई आने के बाद चाय के प्रति उनका लगाव और भी ज्यादा बढ़ गया, उन्होंने बताया कि उनके दिन की शुरुआत दो कप दूध वाली चाय से होती है। वह दिन में किसी भी समय चाय पी सकती है। उनके किचन में हमेशा असम की हरी चाय रखी हुई मिलेगी। उन्होंने बताया कि असम के होने के नाते चाय मेरे खून में है और जब मैं एक कप चाय पीती हूं तो मुझे सुकून का एहसास होता है।

अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस हर साल 21 मई को मनाया जाता है। यह दिन चाय के महत्व और इसके वैश्विक प्रभाव को मनाने के लिए समर्पित है। चाय दुनिया भर में एक लोकप्रिय पेय है, और इसका इतिहास और संस्कृति बहुत समृद्ध है।

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