हरिवंश राय बच्चन ने की दो शादी, बदला सरनेम, दिलचस्प हैं अमिताभ के जन्म का किस्सा

Harivansh Rai Bachchan Birth Anniversary: हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवंबर 1907 को हुआ। वह हिंदी साहित्य के महान कवि और मधुशाला के रचयिता थे। 18 जनवरी 2003 को हरिवंश राय बच्चन का निधन हो गया।
Harivansh Rai Bachchan married twice changed his surname
हरिवंश राय बच्चन (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Harivansh Rai Bachchan Birth Anniversary Special Story: हिंदी साहित्य जगत के महान कवि और साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवंबर 1907 को हुआ था। वे केवल अमिताभ बच्चन के पिता ही नहीं, बल्कि हिंदी कविता को नई दिशा देने वाले उन दिग्गजों में से थे, जिन्होंने 'मधुशाला' जैसी कालजयी कृति लिखकर साहित्य प्रेमियों के दिलों में अमर स्थान बनाया।

हरिवंश राय बच्चन के जीवन से जुड़ा एक ऐसा किस्सा है, जिसे खुद अमिताभ बच्चन कई मंचों पर भावुक होकर याद करते हैं। इस घटना को हाल ही में कौन बनेगा करोड़पति 16 के मंच पर आमिर खान ने शेयर किया, जहां उन्होंने हरिवंश राय की जीवनी से वह अंश पढ़ा, जिसमें अमिताभ के जन्म से जुड़ा एक अद्भुत अनुभव दर्ज था।

अमिताभ बच्चन के जन्म का किस्सा

अमिताभ के जन्म से ठीक पहले जब उनकी मां तेजी बच्चन प्रसव पीड़ा से गुजर रही थीं, तब हरिवंश राय बच्चन ने तेजी से कहा था कि तुम्हें एक बेटा होगा और वह मेरे पिता प्रताप नारायण श्रीवास्तव का पुनर्जन्म होगा। यह भविष्यवाणी किसी अंधविश्वास से नहीं, बल्कि उस सपने से जुड़ी थी, जिसे हरिवंश राय ने कुछ दिनों पहले देखा था। इस विश्वास को उन्होंने अपनी पत्नी तेजी के साथ शेयर किया था।

अमिताभ बच्चन की आंखें हो गई थी नम

आमिर खान द्वारा यह प्रसंग पढ़ने के बाद अमिताभ बच्चन की आंखें नम हो गईं और वे अपने पिता की स्मृतियों में भावुक होते दिखाई दिए। अमिताभ अक्सर सार्वजनिक मंचों पर अपने पिता की कविताओं को पढ़ते हैं और बताते हैं कि हरिवंश राय उनके जीवन के पहले गुरु, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थे।

हरिवंश राय बच्चन की निजी जीवन

हरिवंश राय बच्चन ने दो शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी श्यामा बच्चन मात्र 14 वर्ष की थीं जब उनका विवाह हुआ। दुर्भाग्यवश 1936 में टीबी की बीमारी से उनका निधन हो गया। इस गहरे दुख के पांच वर्ष बाद उन्होंने तेजी सूरी से विवाह किया, जो रंगमंच और संगीत से जुड़ी थीं। तेजी न सिर्फ उनकी जीवनसंगिनी बनीं, बल्कि क्रिएटिव ऊर्जा का नया स्रोत भी साबित हुईं। इसी दौरान बच्चन जी ने 'नीड़ का निर्माण फिर' जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं कीं। 18 जनवरी 2003 को 95 वर्ष की आयु में हरिवंश राय बच्चन का निधन हो गया था।

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