₹20 लाख की मेंबरशिप और 30 साल की वेटिंग...रसूखदारों के जिमखाना क्लब पर चला हंटर, सरकार ने खत्म किया साम्राज्य

Gymkhana Club: लुटियंस दिल्ली में पीएम आवास के बगल में स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार ने वापस लेने का आदेश दिया है।
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जिमखाना क्लब (Image- Social Media)
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Govt Orders Delhi Gymkhana Club to Vacate Premises: राजधानी में लुटियंस दिल्ली के दिल में बसा और देश की सबसे ताकतवर शख्सियतों का पसंदीदा अड्डा दिल्ली जिमखाना क्लब अब इतिहास होने जा रहा है। दिल्ली की एक ऐसी जगह, जहां रसूखदारों की पीढ़ियां बीत जाती थीं, लेकिन उनको एंट्री नहीं मिलती थी। उद्योगपतियों और बड़ी कंपनियों के लिए ₹20 लाख की भारी-भरकम कॉर्पोरेट मेंबरशिप लेने के बाद भी सालों-साल महज एक अदद सदस्यता के लिए वेटिंग लिस्ट में रहते थे लेकिन रसूख, पैसे और रूतबे का यह अभेद्य साम्राज्य अब बिखरने वाला है।

मोदी सरकार ने एक बहुत सख्त और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए इस आलीशान क्लब की सत्ता को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया है और परिसर को खाली करने की तारीख भी तय कर दी है। प्रधानमंत्री आवास के पास मौजूद इस 27.3 एकड़ के वीवीआईपी ठिकाने को अब देश की सुरक्षा और सैन्य बुनियादी ढांचे के लिए समर्पित कर दिया जाएगा।

सरकार ने जारी किया आदेश?

सरकार के इस फैसले से दिल्ली के सत्ता गलियारों में बड़ा भूचाल आ गया है। केंद्रीय मंत्रालय ने आधिकारिक नोटिस जारी करते हुए 27.3 एकड़ के इस पूरे विशाल परिसर को खाली करने का निर्देश दिया है। सरकार की तरफ से इस कार्रवाई के पीछे देश की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े बेहद संवेदनशील कारणों का हवाला दिया गया है। सरकार के आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि यह पूरा भूखंड बहुत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में आता है, जिसकी आवश्यकता देश के डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए जरूरी है।

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जिमखाना क्लब (Image- Social Media)

सरकार ने अपने आदेश में साफ किया है कि 5 जून को सरकारी अधिकारी इस जमीन का शांतिपूर्ण कब्जा वापस लेंगे और अगर इसमें कोई बाधा आई, तो कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।

क्लब की सदस्यता की श्रेणी

सदस्यता श्रेणी प्रारंभिक / रजिस्ट्रेशन फीस (अनुमानित) वेटिंग पीरियड / मुख्य बातें
कॉर्पोरेट मेंबरशिप (Corporate) (सबसे महंगी और प्रीमियम श्रेणी) ₹15 लाख से ₹20 लाख+ बड़ी कंपनियों और बहुराष्ट्रीय फर्मों के शीर्ष अधिकारियों के लिए। इसमें भी लंबी कतार होती है।
गैर-सरकारी / निजी श्रेणी (Non-Government) ₹5 लाख से ₹10 लाख उद्योगपतियों, डॉक्टरों, वकीलों और अन्य रसूखदार नागरिकों के लिए। इसमें 15 से 25 साल तक की सबसे लंबी वेटिंग लिस्ट होती है।
सरकारी श्रेणी (Government) ₹1.5 लाख से ₹2 लाख केवल सिविल सर्वेंट्स (IAS, IPS, IRS) और रक्षा बलों (Armed Forces) के अधिकारियों के लिए। इसमें वेटिंग पीरियड तुलनात्मक रूप से कम होता है।
मासिक मेंटेनेंस शुल्क (Monthly Charges) बेहद मामूली शुल्क सभी श्रेणियों के सदस्यों के लिए क्लब की सुविधाओं के उपयोग और रखरखाव के एवज में हर महीने लिया जाता है।

प्वाइंट्स में समझें पूरी बात

  • लुटियंस दिल्ली के बीच और पीएम आवास (लोक कल्याण मार्ग) के ठीक सामने मौजूद इस क्लब की 27.3 एकड़ जमीन अब पूरे तरीके से सरकारी नियंत्रण में आ जाएगी।
  • केंद्र सरकार द्वारा आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि इस जमीन का उपयोग देश की सुरक्षा और रक्षा ढांचे को मजबूत करने जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।
  • DO ने क्लब के साथ हुई लीज डीड (पट्टा विलेख) की धारा 4 के माध्यम से अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस पट्टे को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है।
  • बता दें कि 5 जून को होने वाली इस ‘री-एंट्री’ प्रक्रिया के तहत जमीन के साथ-साथ वहां बने सभी ऐतिहासिक इमारतें, खेल परिसर और अन्य ढांचे भारत के राष्ट्रपति के अधीन हो जाएंगे।
  • केंद्र सरकार ने क्लब प्रबंधन से बिना किसी विवाद के शांतिपूर्ण तरीके से कब्जा सौंपने के लिए कहा है, ऐसा न होने पर कानून सम्मत बल प्रयोग की चेतावनी भी दी गई है।

सरकार ने क्‍यों लिया यह फैसला?

बता दें कि दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने का यह फैसला केवल एक लीज विवाद या प्रशासनिक फेरबदल नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरे रणनीतिक और सुरक्षा कारण है। पिछले कुछ सालों में वीवीआईपी इलाकों, विशेषकर प्रधानमंत्री आवास और उसके आसपास के सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाने पर सरकार विशेष जोर दे रही है।

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जिमखाना क्लब (Image- Social Media)

अब यह क्लब पीएम आवास के बिल्कुल पास में स्थित है और यहां रोजाना सैकड़ों नागरिकों, मेहमानों और विदेशी नागरिकों की भी आवाजाही होती है इसलिए सुरक्षा एजेंसियां लंबे वक्त से इस क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित करने की योजना पर काम कर रही थीं। ऐसा माना जा रहा है कि इस जमीन का उपयोग आने वाले समय में रक्षा मंत्रालयों के संवेदनशील कार्यालयों या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अति-विशिष्ट विंग के विस्तार के लिए हो सकता है।

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