दिल्ली-NCR में आज से हड़ताल! ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों का फूटा गुस्सा, 21 से 23 मई तक बंद का किया ऐलान

Delhi-NCR Auto Taxi Strike: सीएनजी और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में ऑटो ड्राइवरों का गुस्सा फूटा। दिल्ली-एनसीआर में आज से ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों की 3 दिनों की महा-हड़ताल शुरू हो गई है।
Delhi-NCR Auto Taxi Strike
दिल्ली में टैक्सी ऑटो की हड़ताल (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Delhi-NCR 3 Day Transport Strike May 2026: दिल्ली में आज से ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों ने हड़ताल का ऐलान किया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों, पुराने किराया ढांचे और ऐप-आधारित कंपनियों के कारण हो रहे नुकसान का हवाला देते हुए दिल्ली-एनसीआर में ऑटो, टैक्सी, ट्रांसपोर्ट वाहनों और ऐप-आधारित कैब ड्राइवरों ने तीन दिन के हड़ताल का आह्वान किया है।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और दिल्ली चालक शक्ति यूनियन ने 21 मई से 23 मई तक हड़ताल का ऐलान किया है। एक कैब ड्राइवर ने कहा, "CNG और ईंधन की कीमतों में इतनी भारी बढ़ोतरी के बाद, एक गरीब आदमी क्या करे?" कैब ड्राइवर ने आगे कहा कि पूरी रात काम करने के बाद भी वे 500 रुपये भी नहीं बचा पाते हैं।

500 रुपये बचाना भी मुश्किल

कैब ड्राइवर ने बताया कि तेल, सीएनजी का खर्च और गाड़ियों की किस्तों को निकाल भी दें तो पूरी रात काम करके भी 500 रुपए बचाना मुश्किल हो रहा हैं। 12 घंटे काम करने के बाद 500-600 रुपए के आसपास कुछ रकम बचती हैं। केंद्र सरकार ने 19 मई को पेट्रोल 86 पैसे और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर महंगा किया था। इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपए प्रति लीटर और सीएनजी में 2 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी।

एक्साइज ड्यूटी में कटौती

सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके और तेल कंपनियों को यह निर्देश देकर कि वे आयातित कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से अधिक होने के कारण हुए नुकसान को खुद उठाएं, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को 4.4 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल पर ₹24,500 करोड़ की 'अंडर-रिकवरी' (नुकसान) को खुद उठाकर कीमतें स्थिर रखीं, जिसके बाद दोनों ईंधनों की कीमतें दो चरणों में ₹3.91 प्रति लीटर बढ़ाई गईं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि सरकार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कमी के कारण राजस्व हानि के रूप में 30,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, जबकि तेल कंपनियों को इन दोनों ईंधनों पर 24,500 करोड़ रुपए और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमत स्थिर रखने पर 40,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

Navbharat Live
navbharatlive.com