
दिल्ली में लापता हो रहे लोग। इमेज-एआई
Delhi Missing Persons : नया साल अभी अपनी दहलीज पर ही था कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सुरक्षा और मानवता को झकझोर कर रख दिया है। 2026 के पहले 15 दिनों में जब शहर जश्न और कड़ाके की ठंड के बीच सिमटा हुआ था, तब 800 से अधिक परिवार अपने किसी खास के खोने के गम में डूबे हुए थे। दिल्ली पुलिस के आंकड़े महज संख्या नहीं, बल्कि उन 807 चेहरों की कहानी हैं, जो अचानक रहस्यमय तरीके से ओझल हो गए।
राजधानी की सड़कों पर सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बीच कड़वी हकीकत है कि यहां हर दिन 54 लोग लापता हो रहे हैं। सबसे ज्यादा दर्दनाक यह है कि इनमें से 572 लोगों का अब तक सुराग नहीं मिल सका है। उनके पीछे छूटे परिवारों के लिए हर गुजरता लम्हा अंतहीन इंतजार बन गया है।
इस पूरे संकट में आधी आबादी (महिलाएं और लड़कियां) सबसे ज्यादा असुरक्षित नजर आ रही हैं। कुल लापता लोगों में से दो-तिहाई महिलाएं हैं। आंकड़ों की गहराई में उतरें तो पता चलता है कि इन 15 दिनों में 509 महिलाएं और बच्चियां गायब हुईं, जिनमें से 363 वयस्क महिलाएं अब भी लापता हैं। यह स्थिति राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
बच्चों की सुरक्षा के आंकड़े तो और भी डरावने हैं। पिछले 15 दिनों में 191 नाबालिगों के सिर से उनके घर की छत छिन गई। 169 किशोर लापता हुए, जिनमें 138 लड़कियां शामिल हैं। इनमें से 71% बच्चों का अब तक कुछ पता नहीं चला है। 8 साल से कम उम्र के 9 बच्चे और 12 साल तक के 13 बच्चे गायब हुए हैं। 6 छोटे मासूम ऐसे हैं, जिनके बारे में पुलिस के पास फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। एक बच्चे का गायब होना सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि एक मां की ममता और एक पिता के भरोसे की हार है।
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यह कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि एक गहराता हुआ जख्म है। 2025 में भी 24508 लोग लापता हुए थे। पिछले 10 वर्षों का हिसाब देखें तो दिल्ली से 2 लाख 32 हजार से ज्यादा लोग गायब हो चुके हैं। हालांकि, पुलिस ने 1.8 लाख लोगों को खोज निकाला, लेकिन 52 हजार से अधिक लोग आज भी फाइलों में अनसुलझे बनकर रह गए हैं।






