Explainer: कहीं आप भी तो नहीं हो रहे 'करियर कैटफिशिंग' का शिकार? जानिए एक्सपर्ट की राय

करियर कैटफिशिंग में केवल काम पर न जाने तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें अपने कौशल को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाना, झूठी पहचान बनाना, या अनुभव को गलत तरीके से प्रस्तुत करना भी शामिल हो सकता है।
Explainer: कहीं आप भी तो नहीं हो रहे 'करियर कैटफिशिंग' का शिकार? जानिए एक्सपर्ट की राय
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नवभारत डिजिटल डेस्क : आम तौर पर ऐसा देखा जाता है कि नौकरी के इच्छुक व्यक्ति अपने नियोक्ता को बताए बिना, पहले दिन काम पर नहीं आता है। इस तरह की चीजें खासकर जेनरेशन Z और मिलेनियल्स के बीच देखी जा रही है। ऐसे में आज के इस एक्सप्लेनर में जानेंगे कि ऐसा क्यों होता है और इसे टेक्निकल टर्म में किस नाम से जानते हैं? तो इसके लिए पढ़ते जाइए इस एक्सप्लेनर को अंत तक।

आपको बता दें, अगर कोई भी नौकरी के इच्छुक व्यक्ति अपने नियोक्ता को बताए बिना, पहले दिन काम पर नहीं आता है, तो इसे टेक्निकल भाषा में करियर कैटफिशिंग (Career Catfishing) कहते हैं। करियर कैटफिशिंग एक नई प्रवृत्ति है, जिसमें नौकरी के इच्छुक व्यक्ति अपने नियोक्ता को बताए बिना, पहले दिन काम पर नहीं आते हैं। यह एक प्रकार का धोखाधड़ी है, जहां उम्मीदवार नौकरी का ऑफर स्वीकार करते हैं, लेकिन बिना किसी जानकारी के पहली बार काम पर नहीं आते। यह प्रथा खासकर जेनरेशन Z और मिलेनियल्स के बीच बढ़ी है, जो पारंपरिक कार्यस्थल नियमों को बदलने की कोशिश कर रहे हैं और अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हैं।

करियर कैटफिशिंग केवल काम पर न जाने तक नहीं है सीमित

बाल एवं किशोर मनोचिकित्सकों के अनुसार, करियर कैटफिशिंग में केवल काम पर न जाने तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें अपने कौशल को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाना, झूठी पहचान बनाना, या अनुभव को गलत तरीके से प्रस्तुत करना भी शामिल हो सकता है। इसका मुख्य कारण यह है कि नौकरी पाने के लिए उम्मीदवार अक्सर लंबे और प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रियाओं में अधिक साख प्राप्त करने की कोशिश करते हैं, जो उन्हें सचमुच की क्षमता के बजाय दिखावे पर अधिक ध्यान देते हैं।

मनोचिकित्सक डॉ. पवन बरनवाल ने बताया करियर कैटफिशिंग का कारण

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो करियर कैटफिशिंग करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मनोचिकित्सक डॉ. पवन बरनवाल के अनुसार, यह न केवल असुरक्षा या धोखेबाज सिंड्रोम (Imposter Syndrome) का परिणाम हो सकता है, बल्कि यह नौकरी पाने की तीव्र इच्छा और नियोक्ता की अपेक्षाओं से मेल खाने के दबाव के कारण भी हो सकता है। कई उम्मीदवार अपने रिज्यूमे को बेहतर बनाने के लिए गलत तरीके से जानकारी प्रस्तुत करते हैं, ताकि वे नौकरी प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, लंबे समय तक प्रतिक्रिया न मिलने, अस्पष्ट नौकरी विवरण, और पारंपरिक भर्ती मानदंडों से निराश होकर भी लोग इस रणनीति का सहारा लेते हैं।

क्या केवल जेन Z ही इस प्रथा में शामिल हैं?

हालांकि करियर कैटफिशिंग की प्रवृत्ति जेन Z और मिलेनियल्स के बीच अधिक देखने को मिलती है, लेकिन यह केवल इन दो पीढ़ियों तक सीमित नहीं है। डॉ. पवन बरनवाल, नवभारतलाइवडॉटकॉम के पत्रकार विकास कुमार उपाध्याय से इस बारे में बताते हैं कि जेन एक्स और वरिष्ठ अधिकारी भी अपनी पेशेवर जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए रिज्यूमे में वृद्धि या गलत बयानी करने के दोषी हो सकते हैं। इसका मतलब है कि यह केवल एक पीढ़ी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह समग्र रूप से कार्यस्थल में एक व्यापक समस्या बन चुका है। अन्य एक्सप्लेनर या स्पेशल खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें….

करियर कैटफिशिंग के मनोवैज्ञानिक प्रभाव

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि करियर कैटफिशिंग से शॉर्ट-टर्म लाभ भले ही मिले, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव नकारात्मक हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति का धोखा सामने आ जाता है, तो उसे मानसिक दबाव, चिंता, और तनाव का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए भी यह समस्या पैदा कर सकती है, क्योंकि इससे कामकाजी उत्पादकता में कमी, अधिक रिक्तियां, और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी हो सकती है।

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