
उद्धव ठाकरे के खिलाफ प्रदर्शन करते कोंकण मराठी समाज के लोग (सोर्स: सोशल मीडिया)
Uddhav Thackeray Statement Controversy: मुंबई की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब उद्धव ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम के नाम का गलत उच्चारण किया। कोंकणी समुदाय ने इसे अपनी अस्मिता का अपमान बताते हुए सोमवार को वर्ली की सड़कों पर उतरकर उद्धव ठाकरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
विवाद की शुरुआत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई। उद्धव ठाकरे से बीजेपी नेता अमित साटम के उस बयान पर सवाल पूछा गया था, जिसमें साटम ने शिवसेना (UBT) नेताओं के उमर खालिद से जुड़े होने का दावा किया था। जवाब देते समय ठाकरे ने कथित तौर पर अमित साटम को “चाटम” कहकर संबोधित किया। इस टिप्पणी को बीजेपी और कोंकणी समुदाय ने एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज के उपनाम का उपहास माना।
वर्ली में जुटे प्रदर्शनकारियों और बीजेपी नेताओं ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी नेता आरती पुगांवकर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उद्धव ठाकरे को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ बालासाहेब ठाकरे की विरासत तो मिली है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि उस महान विरासत की गरिमा कैसे बचाई जाए।” प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक पूर्व मुख्यमंत्री से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं थी।
Mumbai, Maharashtra: During the BMC election period, a controversy arose after Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray allegedly mispronounced the name of BJP Mumbai president Amit Satam at a press conference, leading to protests by the Konkan Marathi community pic.twitter.com/J3EvqqytmL — IANS (@ians_india) January 5, 2026
खुद पर हुई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित साटम ने कहा, “उद्धव ठाकरे ने सिर्फ मेरा अपमान नहीं किया, बल्कि हर उस मराठी व्यक्ति का अपमान किया है जो कोंकण और मालवण की मिट्टी से जुड़ा है। एक मालवणी होने के नाते, मुझे लगता है कि यह हमारे पूरे समुदाय की जड़ों पर प्रहार है।”
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वहीं, बीजेपी विधायक राम कदम ने उद्धव ठाकरे के “अहंकार” पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक तरफ उद्धव जी मराठी अस्मिता और सम्मान की बात करते हैं, और दूसरी तरफ एक सम्मानित मराठी व्यक्ति के सरनेम का मजाक उड़ाते हैं। यह दोहरा मापदंड उनके राजनीतिक पतन और अहंकार को दर्शाता है। उन्हें तुरंत अपने शब्दों के लिए माफी मांगनी चाहिए।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद बहस छिड़ गई है। जहां शिवसेना (UBT) के समर्थक इसे एक सामान्य शाब्दिक भूल बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे कोंकणी और मालवणी संस्कृति के प्रति अनादर के रूप में पेश कर रहे हैं। आने वाले निकाय चुनावों से पहले, उपनाम पर शुरू हुई यह जंग मुंबई की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनती दिख रही है।






