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बढ़ती ब्याज दरें: बैंक FD या म्यूचुअल फंड, क्या बेहतर?
- Written By: विष्णू भारद्वाज

मुंबई: विश्व स्तर पर रिकॉर्ड तोड़ महंगाई (High Inflation) को काबू में करने के लिए तमाम देशों के केंद्रीय बैंक (Central Banks) ब्याज दरों (Interest Rates) में लगातार वृद्धि कर रहे हैं। यह बात अलग है कि इसके बावजूद महंगाई कंट्रोल में नहीं आ रही है। लिहाजा ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी का क्रम जारी है। बीते सप्ताह अमेरिका के फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) तथा बैंक ऑफ इंग्लैंड ने अपनी दरों में फिर 0.75% की बड़ी वृद्धि करने की घोषणा की। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी मई 2022 से अब तक 4 बार अपनी ब्याज दर यानी रेपो रेट (Repo Rate) में कुल 1.90% की बढ़ोत्तरी कर चुका है तथा आगे और वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। अब रेपो रेट 5.90% हो गयी है, जो अप्रैल 2022 में 4% के न्यूनतम स्तर पर थी। आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में लगातार वृद्धि के कारण देश में वाणिज्यिक बैंक भी सावधि जमा दरों यानी फिक्स डिपॉजिट (Fixed Deposit-FD) रेट्स बढ़ा रहे हैं।
इससे कई वर्षों बाद फिर बैंक एफडी पर रिटर्न बढ़ने से लोगों का झुकाव बैंकों की तरफ होता दिख रहा है। हालांकि जितनी वृद्धि आरबीआई ने रेपो रेट में की है, उतनी वृद्धि बैंकों ने अपनी सावधि जमा दरों में नहीं की है। इस वजह से बैंकों की डिपॉजिट ग्रोथ (Deposit Growth) अभी तक सुस्त थी। आरबीआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान वित्तीय वर्ष में अभी तक बैंकों की जमा राशियों में केवल 9.6% की ग्रोथ दर्ज हुई है। जबकि पिछले वर्ष 10.2% की ग्रोथ हुई थी। इसके विपरीत अर्थव्यवस्था (Economy) में तेजी कायम रहने से लोन डिमांड (Loan Demand) तेज हो रही है। इस साल बैंक ऋण वितरण में 17.9% की तेज ग्रोथ दर्ज हुई है। जबकि पिछले साल सिर्फ 6.5% की ही ग्रोथ हुई थी। इस साल अभी तक डिपॉजिट ग्रोथ कम होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि बैंकों ने अपनी नियमित जमा दरों में 0.35% से लेकर 0.90% की मामूली वृद्धि की है।
बैंक ला रहे हैं ज्यादा ब्याज वाली विशेष स्कीम
अब जबकि लोन डिमांड ज्यादा आ रही है और डिपॉजिट्स कम तो लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए बैंकों के बीच जमा राशि आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गयी है। इसी कारण कई बैंक अधिक ब्याज वाली विशेष जमा स्कीम लॉन्च करने लगे हैं। देश के तीसरे बड़े सरकारी बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने ‘बड़ौदा तिरंगा प्लस डिपॉजिट’ स्कीम शुरू की है। इस स्कीम में जमाकर्ता को 399 दिनों की अवधि की जमा पर 6.75% की दर से ब्याज मिलेगा। इसमें वरिष्ठ नागरिकों को आधा फीसदी ज्यादा ब्याज दिया जाएगा। इसी तरह IDBI Bank ने 700 दिनों की अवधि वाली विशेष ‘अमृत महोत्सव डिपॉजिट’ स्कीम शुरू की है, जिसमें आम जमाकर्ता को 7% एवं वरिष्ठ नागरिकों को 7.50% की दर से ब्याज मिलेगा। इसके अलावा 555 दिनों की अवधि वाली स्कीम में 6.50% एवं वरिष्ठ नागरिकों को 7% ब्याज प्रतिफल ऑफर दिया रहा है। जबकि बैंक ऑफ इंडिया (Bank of india) 777 दिनों की अवधि वाली विशेष ‘स्टार सुपर ट्रिपल सेवन फिक्स डिपॉजिट’ स्कीम लेकर आया है। इसमें बैंक आम जमाकर्ता को 7.25% तथा वरिष्ठ नागरिक को 7.75% ब्याज देगा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) 599 दिनों की अवधि वाली अपनी विशेष स्कीम में 7% ब्याज प्रतिफल ऑफर कर रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र का ही केनरा बैंक (Canara Bank) 666 दिनों की अवधि वाली अपनी विशेष स्कीम में आम जमाकर्ता को 7% तथा वरिष्ठ नागरिकों को 7.5% ब्याज दे रहा है। जबकि निजी क्षेत्र का IDFC फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) 750 दिनों की अवधि वाली अपनी विशेष डिपॉजिट स्कीम में आम जमाकर्ता को 7.25% तथा वरिष्ठ नागरिकों को 7.75% ब्याज दे रहा है।
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ब्याज दरों में और वृद्धि के आसार
विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई ब्याज दरों में 0.35 से लेकर 0.5% की वृद्धि और कर सकता है। साथ ही वाणिज्यिक बैंक भी अपनी जमा दरों में करीब आधा फीसदी की वृद्धि करेंगे। इससे ज्यादा वृद्धि होने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है क्योंकि भारत में महंगाई दर में कमी आने के संकेत दिखने लगे हैं।
म्यूचुअल फंडों की तरफ हुआ झुकाव
विगत 3 वर्षों में ब्याज दरों में लगातार कटौती किए जाने से एक महत्वपूर्ण बदलाव यह आया है कि आम निवेशकों की बचत (Savings) अब बैंकों में कम और म्यूचुअल फंडों (Mutual Funds) में ज्यादा जाने लगी है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय परिवारों की कुल फाइनेंशियल एसेट्स में बैंक डिपॉजिट की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2022 में घटकर 25.5% रह गयी है, जो वित्त वर्ष 2022 में 34.4% के स्तर पर थी। इसके विपरीत विगत 3 वर्षों में म्यूचुअल फंडों की हिस्सेदारी 2.6% से बढ़कर 6.3% पर पहुंच गयी है। इसी तरह इक्विटी मार्केट (Equity Market) में भी बचत का हिस्सा 1.1% से बढ़कर 1.9% हो गया है। स्पष्ट है कि बैंकों में ब्याज कमाई घटने के कारण लोग अब ज्यादा रिटर्न (Return) के लिए म्यूचुअल फंडों और इक्विटी मार्केट की तरफ रूख कर रहे हैं। इसी वजह से म्यूचुअल फंडों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर माह लगभग 13,000 करोड़ रुपए का निवेश आने लगा है। विश्लेषकों का कहना है कि 3 से 10 साल की अवधि में यानी लॉन्ग टर्म में अच्छी वेल्थ बनाने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड एक बढ़िया विकल्प है, निफ्टी (Nifty) आधारित ईटीएफ स्कीमों में 10 साल में 12 से 14% वार्षिक रिटर्न मिला है, लेकिन विगत 1 साल में मात्र 1% का ही रिटर्न मिला है। ICICI प्रू निफ्टी नेक्स्ट 50 इंडेक्स फंड (ICICI Pru Nifty Next 50 Index Fund) ने 1 साल में तो 0.9%, लेकिन 10 साल में 14.5% का वार्षिक रिटर्न दिया है। परंतु वर्तमान में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव और बढ़ती ब्याज दरों के मद्देनजर 1 से 3 साल की अवधि के लिए बैंक एफडी अधिक सुरक्षित विकल्प है, जहां 6 से 7% का फिक्स रिटर्न मिल रहा है।

[blockquote content=” विगत वर्षों में ब्याज दरें घटने जो रिटेल निवेशक दूर हो गए थे, वे अब फिर बैंकों की तरफ आकर्षित होने लगे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इक्विटी मार्केट में अनिश्चतता और जोखिम बढ़ने से रिटर्न कम हो गया है। ऐसे में जो इन्वेस्टर अपने इन्वेस्टमेंट पर सेफ्टी और लिक्विडिटी के साथ फिक्स रिटर्न की चाहत रखते हैं, उनके लिए बैंक एफडी सबसे बेस्ट ऑप्शन है। अब बैंक डिपॉजिट्स में अच्छी ग्रोथ होती दिख रही है। महंगाई दर उच्च स्तर पर होने से आगे ब्याज दरों में और बढ़ोत्तरी की संभावना है। जिससे बैंक एफडी के प्रति आकर्षण बढ़ेगा। जहां तक होम लोन दरों की बात है, बैंक ऑफ महाराष्ट्र ही एकमात्र ऐसा बैंक है, जिसने दरों में वृद्धि की बजाय कटौती की है। बैंक का ‘कासा’ (करंट अकाउंट सेविंग अकाउंट रेशियो) अच्छी स्थिति में होने के कारण हमारी पूंजी लागत कम है और हम इसका फायदा अपने ग्राहकों को घर का सपना साकार करने के लिए दे रहे हैं। बैंक ने अपनी होम लोन दर 8.6% से घटाकर 8% कर दी है, जो इंडस्ट्री में सबसे कम है। इस वजह से होम लोन सेगमेंट में अच्छी डिमांड आ रही है।” pic=”” name=” -मनोज कारे, महाप्रबंधक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र”]
[blockquote content=”जब भी आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तब इसका असर बैंक डिपॉजिट रेट्स पर कुछ देर बाद ही होता है। इसलिए एफडी रेट धीरे-धीरे बढ़ते है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। लेकिन एसवीसी बैंक ने लगभग रेपो रेट के बराबर ही अपनी जमा दरों में वृद्धि की है। इस साल आरबीआई ने अपनी रेपो रेट में 1.90% की वृद्धि की है और एसवीसी बैंक ने जमा दरों में 1.40% की वृद्धि कर दी है। हमारी 390 दिनों की अवधि वाली डिपॉजिट स्कीम में आम जमाकर्ता के लिए ब्याज दर 6.5% और सीनियर सिटीजन के लिए 6.75% कर दी गयी है, जो मार्च 2022 में 5% थी। अच्छी बात यह है कि उद्योग क्षेत्रों में निवेश चक्र बढ़ने से बैंक क्रेडिट ग्रोथ बढ़ रही है। साथ ही कंज्यूमर लोन की डिमांड भी अच्छी है। हमारा मानना है कि ब्याज दरों में वृद्धि का क्रम अगले 8 से 10 महीने जारी रह सकता है। इस दौरान ब्याज दरों में करीब 0.5% की वृद्धि संभव है। आम निवेशक के लिए यह सही समय है कि वह बैंक एफडी में निवेश बढ़ाए क्योंकि डेब्ट म्यूचुअल फंड से अधिक रिटर्न बैंक एफडी में मिलने लगा है। एसेट अलोकेशन की दृष्टि से देखा जाए तो हमेशा एक बैलेंस पोर्टफोलियो होना चाहिए। यदि निवेशक को 3, 5 या 10 साल के लिए निवेश करना है तो इक्विटी म्यूचुअल फंड सही है, वह भी एसआईपी के माध्यम से और यदि 1, 2 या 3 साल के लिए फिक्स रिटर्न चाहिए तो बैंक एफडी सबसे सेफ ऑप्शन है। ” pic=”” name=”-आशीष सिंघल, प्रबंध निदेशक, एसवीसी बैंक”]
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