TET की अनिवार्यता खत्म करने से अधिकारियों का इनकार; सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला, पर मिला अनोखा आश्वासन

MP News: DPI और शिक्षक संगठनों के बीच हुई बैठक में 2018 से पहले की 20 वर्ष की सेवा अवधि को शून्य मानने का विरोध किया गया। आयुक्त ने TET और वरिष्ठता के मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय का भरोसा दिया।
MP Teachers Association Meets DPI Commissioner Demands Seniority From First Appointment Date
डीपीआई कार्यालय (सोर्स- सोशल मीडिया)
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DPI Teachers Meeting: भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय में प्रदेश के शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों और शासकीय शिक्षक संगठन के प्रतिनिधिमंडल के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग उठाई, लेकिन अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए इसे वापस लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, शिक्षकों के आक्रोश को देखते हुए अधिकारियों ने इस मुद्दे पर उनका समर्थन करने की बात कही है।

इन मुद्दों पर हुई विस्तार से चर्चा

बैठक में शिक्षक पात्रता परीक्षा, मध्य प्रदेश राज्य शिक्षा सेवा में नियुक्त नए शिक्षक संवर्ग की सेवा अवधि की गणना उनकी पहली नियुक्ति तिथि से करने, उच्च पद के प्रभार की प्रक्रिया में तेजी लाने, जनजातीय विभाग की स्कूलों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन तथा अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े नियमों के सरलीकरण सहित कई अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

इन वजहों से शिक्षकों को उठाना पड़ रहा नुकसान?

संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि वर्ष 2018 में शिक्षाकर्मी, गुरूजी और संविदा शाला शिक्षक संवर्ग का राज्य शिक्षा सेवा में संविलियन किया गया था। उन्होंने कहा कि इस संवर्ग की पूर्व की करीब 20 वर्षों की सेवा को शून्य मानते हुए वरिष्ठता, ग्रेच्युटी, अर्जित अवकाश और पेंशन जैसे महत्वपूर्ण मामलों में सेवा अवधि की गणना 1 जुलाई 2018 से की जा रही है। इसके कारण हजारों शिक्षकों को आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर नुकसान उठाना पड़ रहा है।

शिक्षकों की मांग इस आधार पर मिले वरिष्ठता का लाभ

संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी राजेश साहू, राजेंद्र गुप्ता और नितेश नागर ने मांग की कि नवीन शिक्षक संवर्ग के शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना उनकी पहली नियुक्ति तिथि से की जाए और उन्हें उसी आधार पर वरिष्ठता का लाभ दिया जाए। इसके अलावा उन्होंने आदिवासी विकास विभाग की स्कूलों का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग को सौंपने की मांग भी उठाई, ताकि पूरे प्रदेश में शिक्षकों की व्यवस्था में एकरूपता लाई जा सके।

शिक्षकों की मांग पर क्या बोले लोकशिक्षण आयुक्त

मांगों पर विस्तार से चर्चा करते हुए लोकशिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने स्पष्ट कहा कि टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के मुद्दे पर विभाग पूरी तरह शिक्षकों के साथ खड़ा है और उनके हित में हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि अन्य मांगों पर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

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