भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर 7 घंटे की चर्चा, ट्रंप टैरिफ पर कहां तक पहुंची बात; मंत्रालय ने दिया अपडेट

India-America Trade: अमेरिका चाहता है कि उसके डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, पनीर, घी को भारत में आयात की अनुमति मिले। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इस सेक्टर में करोड़ों किसान लगे हैं।
India-US trade deal discussed for 7 hours
नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप, (फाइल फोटो)
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India-America Trade Deal: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद पहली बार ट्रेड डील पर बातचीत के लिए अमेरिकी डेलिगेशन भारत पहुंचा। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता के बाद कॉमर्स मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा कि भारत और अमेरिका ने ट्रेड डील को जल्द से जल्द फाइनल करने के अपनी कोशिशें तेज करने का फैसला किया है।

वाणिज्य मंत्रालय के बयान के मुताबिक, मीटिंग में व्यापार समझौता के कई पहलुओं पर सकारात्मक चर्चा हुई। दोनों देशों का लक्ष्य एक ऐसा समझौता करना है, जो दोनों के लिए फायदेमंद हो और द्विपक्षीय व्यापार को और मजबूत करे। यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध को गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दोनों देशों के बीच 7 घंटे की चर्चा

कॉमर्स मिनिस्ट्री ने यह बयान आज नई दिल्ली में हुई करीब 7 घंटे की मीटिंग के बाद जारी किया। इस मीटिंग में अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस के चीफ नेगोशिएटर ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक टीम ने भारत के कॉमर्स डिपार्टमेंट के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल के साथ चर्चा की। दोनों पक्षों ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों के महत्व को स्वीकार किया।

25-29 अगस्त के बीच होनी थी छठे दौर की बातचीत

हालांकि, इस मीटिंग में यह तय नहीं हुआ है कि ट्रेड डील पर छठे राउंड की बातचीत कब होगी। दोनों देशों के बीच ट्रेड पर छठे दौर की बातचीत 25 से 29 अगस्त के बीच होनी थी, लेकिन अमेरिका की ओर से भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के कारण इसे टाल दिया गया था। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर यह टैरिफ लगाया था।

भारत से क्या चाहता है अमेरिका?

अमेरिका चाहता है कि उसके डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, पनीर, घी को भारत में आयात की अनुमति मिले। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इस सेक्टर में करोड़ों छोटे किसान लगे हुए हैं। भारत सरकार को डर है कि अगर अमेरिकी डेयरी उत्पाद भारत में आएंगे, तो वे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा धार्मिक भावना भी जुड़ी हुई हैं। अमेरिका में गायों को बेहतर पोषण के लिए जानवरों की हड्डियों से बने एंजाइम (जैसे रैनेट) को उनके खाने में मिलाया जाता है। भारत ऐसी गायों के दूध को ‘नॉन वेज मिल्क’ यानी मांसाहारी दूध मानता है।

500 बिलियन डॉलर के व्यापार का लक्ष्य

भारत और अमेरिका का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जुलाई 2025 में भारत का अमेरिका को निर्यात 21.64% बढ़कर 33.53 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 12.33% बढ़कर 17.41 अरब डॉलर रहा।

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