
भारतीय शेयर बाजार में Gen-Z इनवेस्टर्स (सोर्स-सोशल मीडिया)
How Gen Z invests in Mutual Funds: भारतीय वित्तीय बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है जहां 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए जेन-जी निवेशक पारंपरिक बचत के बजाय स्मार्ट निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। ये युवा निवेशक तकनीक के साथ कदम मिलाते हुए म्यूचुअल फंड और इक्विटी में न केवल पैसा लगा रहे हैं बल्कि जोखिम लेने की क्षमता भी दिखा रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि निवेश का यह जज्बा केवल दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है बल्कि छोटे शहरों के युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। आज के युवा वित्तीय स्वतंत्रता पाने के लिए डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर अपनी निवेश यात्रा बहुत ही कम उम्र में शुरू कर रहे हैं।
आज के युवा निवेशक पारंपरिक बैंक एजेंटों के चक्कर लगाने के बजाय मोबाइल आधारित फिनटेक प्लेटफॉर्म्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं क्योंकि ये पारदर्शी और आसान हैं। आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2025 में हुए अधिकांश नए SIP रजिस्ट्रेशन डिजिटल ऐप्स के माध्यम से किए गए हैं जो तकनीक की बढ़ती ताकत को दर्शाते हैं। SIP कलेक्ट करने वाले टॉप संस्थानों में अब फिनटेक कंपनियों का वर्चस्व बढ़ रहा है जिससे निवेश प्रक्रिया अब आम आदमी की जेब तक पहुंच गई है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 30 साल से कम उम्र के निवेशकों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2019 में जहां युवाओं की भागीदारी केवल 22 प्रतिशत थी वहीं अब यह बढ़कर लगभग 38 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है जो बाजार के भविष्य के लिए अच्छा संकेत है। फोनपे वेल्थ जैसी रिपोर्ट्स के अनुसार उनके प्लेटफॉर्म पर लगभग आधे निवेशक युवा हैं जो अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा म्यूचुअल फंड में डाल रहे हैं।
जेन-जी निवेशक लंबी अवधि के फायदों को समझते हुए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करना सबसे सुरक्षित और लाभदायक रास्ता मानते हैं क्योंकि इसमें रिटर्न की संभावना अधिक है। लगभग 57 प्रतिशत युवा इनवेस्टर्स SIP का रास्ता चुनते हैं क्योंकि यह उन्हें हर महीने एक छोटी और निश्चित राशि निवेश करने की सुविधा प्रदान करता है। एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करने की यह आदत युवाओं को बाजार की अस्थिरता से बचने और अनुशासित बचत करने में मदद कर रही है।
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निवेश की यह क्रांति अब बड़े शहरों की सीमाओं को लांघकर जोधपुर, रायपुर और विशाखापत्तनम जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों तक मजबूती से पहुंच गई है। अध्ययन बताते हैं कि लगभग 81 प्रतिशत युवा निवेशक देश के टॉप 30 शहरों से बाहर के हैं जो खुद अपनी रिसर्च करके निवेश का फैसला लेते हैं। ये युवा ‘डू-इट-योरसेल्फ’ मॉडल को अपनाते हुए कम लागत वाले इंडेक्स फंड और ईटीएफ को चुन रहे हैं जो उनकी जागरूक मानसिकता का प्रमाण है।






