रेलवे के नियमों में बदलाव! अब बेटियों को जीवनभर फ्री में मिलेंगी ये सुविधाएं, यहां पढ़ें पूरी डिटेल

Indian Rail: नॉर्थ सेंट्रल रेलवे (NCR) के चीफ पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि यह सुविधा NCR जोन में लागू कर दी गई है। इसे सख्ती से लागू किया जाएगा।
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भारतीय रेलवे, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Indian Railway: भारतीय रेलवे ने अपने कर्मचारियों के फैमिली की भलाई के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब रेलवे कर्मचारियों की अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटियां अपने माता-पिता की मौत के बाद भी हेल्थ बेनिफिट्स और ट्रैवल पास का फायदा उठा सकेंगी। इस कदम से हजारों ऐसे परिवारों को राहत मिलेगी जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और पेंशन या दूसरे सरकारी फायदों पर निर्भर हैं।

बिजनेस लीग की रिपोर्ट के अनुसार, पहले की व्यवस्था में रेल कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनकी विधवा पत्नी को 'विधवा पास' और रिटायर्ड एम्प्लायी लिबरलाइज्ड हेल्थ स्कीम (आरईएलएचएस) के तहत फ्री में मेडिकल सुविधाएं मिलती थीं। लेकिन पत्नी के निधन के बाद ये सुविधाएं आश्रित बेटियों तक नहीं पहुंच पाती थीं, जिससे उन्हें अस्पतालों और रेलवे कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे।

अब मुफ्त में मिलेंगी ये सुविधाएं

हालांकि, अब रेलवे बोर्ड की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सेकेंडरी फैमिली पेंशन प्राप्त करने वाली बेटियां रेलवे परिवार का अभिन्न अंग मानी जाएंगी। उन्हें रेलवे अस्पतालों में मुफ्त इलाज, दवाइयां और अन्य चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। स्वास्थ्य निदेशालय ने पुष्टि की है कि निर्भरता की शर्तों को पूरा करने वाली अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटियां इस योजना से बाहर नहीं होंगी। यूनिवर्सल मेडिकल आइडेंटिटी कार्ड (उम्मीद) भी प्राथमिकता से जारी किया जाएगा।

रेलवे कर्मचारियों के परिवारों को फायदा

रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, इंडियन रेलवे ने यात्रा सुविधाओं में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले विधवा पास पत्नी के निधन के बाद खत्म हो जाता था, लेकिन अब इसे परिवार की सबसे बड़ी पात्र बेटी के नाम ट्रांसफर किया जाएगा। इस पास के जरिए अन्य आश्रित सदस्य भी यात्रा कर सकेंगे। अगर वे नियमों के अनुसार पात्र हैं। इससे बेटियों को देशभर में बिना अतिरिक्त खर्च यात्रा करने की सुविधा मिलेगी।

NCR जोन में नियम लागू

नॉर्थ सेंट्रल रेलवे (NCR) के चीफ पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि यह सुविधा NCR जोन में लागू कर दी गई है। इसे सख्ती से लागू किया जाएगा। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेन्स यूनियन के जनरल सेक्रेटरी आरडी यादव ने कहा कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की ओर से लंबे समय से यह मांग की जा रही थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे न सिर्फ महिलाओं को मजबूती मिलेगी, बल्कि रेलवे की सामाजिक छवि भी बेहतर होगी।

अब बेटियों से नहीं कोई भेदभाव

रेलवे बोर्ड के हालिया सर्कुलर और स्पष्टीकरणों के तहत यह बदलाव RELHS-97 और पास नियमों को और उदार बनाता है। अब आश्रित बेटियां बिना किसी भेदभाव के स्वास्थ्य और यात्रा सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी, जो उनके लिए सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक साबित होगा।

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