सावधान! बाजार में आई नकली चांदी की बाढ़, BIS ने जारी की चेतावनी; खरीदारी से पहले पढ़ लें यह रिपोर्ट

Fake Silver In Market: विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह सोने के लिए सख्त हॉलमार्किंग और लाइसेंसिंग सिस्टम लागू है, उसी तरह चांदी के लिए भी मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
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भारतयी बाजार में नकली चांदी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Fake Silver In Indian Market: भारत में चांदी की बढ़ती कीमत और निवेश की तेज डिमांड के बीच अब बाजार में नकली और लो-क्वॉलिटी की चांदी एक नई समस्या बनकर उभर रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि बाजार में बिक रही कई सिल्वर बार, सिक्के और ज्वेलरी शुद्धता के तय मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। इससे न केवल ग्राहकों को नुकसान हो रहा है, बल्कि पूरे सिल्वर मार्केट की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

देश में पिछले कुछ समय से चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। निवेशक सोने के साथ-साथ चांदी को भी सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं। यही वजह है कि सिल्वर बार, कॉइन और चांदी के बर्तनों की मांग तेजी से बढ़ी है। लेकिन, बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कुछ कारोबारी और नकली उत्पाद बनाने वाले लोग बाजार में कम शुद्धता वाली चांदी बेच रहे हैं।

बाजार में बड़ी मात्रा में नकली चांदी

कीमती धातु उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में बड़ी मात्रा में ऐसी चांदी मौजूद है, जिसमें 999 प्योरिटी का मानक पूरा नहीं होता। कई मामलों में चांदी में निकेल, कैडमियम और लेड जैसे प्रतिबंधित तत्व भी पाए जा रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माने जाते हैं। खास चिंता की बात यह है कि ऐसी धातुएं अक्सर स्क्रैप सिल्वर से बनी ज्वेलरी और अन्य वस्तुओं में मिल रही हैं। BIS (Bureau of Indian Standards) ने सितंबर 2025 से चांदी की हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया है, लेकिन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अभी भी बड़ी संख्या में ज्वेलर्स इस नियम का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे। इससे ग्राहकों के लिए असली और नकली चांदी की पहचान करना मुश्किल हो रहा है।

सख्त हॉलमार्किंग व्यवस्था लाने की मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह सोने के लिए सख्त हॉलमार्किंग और लाइसेंसिंग सिस्टम लागू है, उसी तरह चांदी के लिए भी मजबूत व्यवस्था जरूरी है। फिलहाल भारत में सालाना करीब 7,000 टन चांदी की खपत होती है, लेकिन इसके लिए केवल 286 अस्सेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर मौजूद हैं। तुलना करें तो सोने की खपत इससे काफी कम है, फिर भी गोल्ड के लिए 1,500 से ज्यादा सेंटर हैं। यही असंतुलन चांदी के बाजार में बड़ी समस्या बनता जा रहा है। देश के जयपुर, आगरा, राजकोट, कोल्हापुर, सलेम और कटक जैसे शहर चांदी के आभूषण और धार्मिक वस्तुएं बनाने के बड़े केंद्र माने जाते हैं। यहां बड़ी मात्रा में चांदी से बने बर्तन, पूजा सामग्री और सिक्के तैयार होते हैं। लेकिन, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनमें से कई उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली चांदी की गुणवत्ता संदिग्ध होती है।

क्वॉलिटी-सर्टिफाइड सिल्वर बार लाने की तैयारी

अब रिफाइनरी कंपनियां सरकार से मांग कर रही हैं कि चांदी रिफाइन करने वाली यूनिट्स के लिए भी लाइसेंसिंग सिस्टम अनिवार्य किया जाए। उनका कहना है कि इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को शुद्ध चांदी मिल सकेगी। इस बीच BSE और NSE (National Stock Exchange of India) भी अपने कमोडिटी प्लेटफॉर्म पर क्वॉलिटी-सर्टिफाइड सिल्वर बार लाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे निवेशकों को प्रमाणित और भरोसेमंद चांदी खरीदने का विकल्प मिल सकता है।

तेजी से बढ़ रहा नकली चांदी का कारोबार

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में अगर सरकार और BIS ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो नकली और घटिया चांदी का कारोबार और बढ़ सकता है। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल BIS हॉलमार्क वाली चांदी ही खरीदें और निवेश से पहले उसकी शुद्धता जरूर जांचें।

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