BYJU'S के संस्थापक रवींद्रन को सिंगापुर में जेल, 22 बिलियन डॉलर से दिवालियापन तक का सफर, जानें पूरा मामला

Byju's Legal Troubles 2026: एडटेक दिग्गज 'बायजू' के संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की एक अदालत ने 6 महीने की जेल की सजा सुनाई है। जानिए मामला क्या है।
Byju Raveendran Singapore jail sentence
बायजू रवींद्रन, फोटो- सोशल मीडिया
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Byju Raveendran Singapore Jail Sentence: संकटों से घिरी एडटेक कंपनी बायजू के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बायजू रवींद्रन को यह सजा कोर्ट के आदेशों की अवमानना और अपनी संपत्तियों का सही ब्यौरा न देने के कारण दी गई है।

बुधवार, 27 मई 2026 को सिंगापुर की एक अदालत ने कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन को छह महीने के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने यह फैसला रवींद्रन द्वारा अपनी संपत्तियों से संबंधित अदालती आदेशों का पालन न करने और अवमानना करने के मामले में सुनाया है।

सिंगापुर कोर्ट का सख्त आदेश

अदालत ने केवल जेल की सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि रवींद्रन को तुरंत अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश भी दिया है। इसके अलावा उन्हें कानूनी लागत के रूप में लगभग $70,500 का भुगतान करने को कहा गया है। अदालत ने उनसे 'Beeaar Investco Pte' नामक कॉर्पोरेट इकाई के स्वामित्व को साबित करने वाले दस्तावेज भी मांगे हैं, जो एक संबंधित कंपनी में शेयर रखती है।

बायजू रवींद्रन बोले- गुमराह करने वाली जानकारी

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बायजू रवींद्रन ने कहा कि उन्हें इस मामले की रिपोर्टिंग के तरीके से निराशा हुई है और यह उनके बारे में भ्रामक धारणा पैदा कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि कर्जदाताओं और निवेशकों के साथ समझौता लगभग पूरा होने वाला है और सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमति बन गई है। उन्होंने अदालती कार्यवाही का सक्रिय रूप से विरोध इसलिए नहीं किया क्योंकि सभी पक्ष समाधान की दिशा में काम कर रहे थे। रवींद्रन ने जोर देकर कहा कि इसमें उनकी या अन्य संस्थापकों की ओर से कोई गलत काम नहीं किया गया है।

22 बिलियन डॉलर से 'शून्य' तक का सफर

कभी भारत की सबसे सफल स्टार्टअप कहानी मानी जाने वाली बायजू की शुरुआत 2011 में हुई थी और 2022 में इसका मूल्य 22 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कंपनी को कई मोर्चों पर कानूनी लड़ाइयों का सामना करना पड़ा है। कंपनी अमेरिका में $1.2 बिलियन के लोन को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रही है, जहां उन पर धन छिपाने के आरोप लगे हैं। भारत में ईडी ने विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन के आरोप में उनके परिसरों की तलाशी ली थी।

भारत में भी कंपनी दिवालियापन की कार्यवाही का सामना कर रही है और रवींद्रन ने खुद स्वीकार किया है कि कंपनी की वैल्यू अब प्रभावी रूप से शून्य हो गई है। अब यह ताजा मामला कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी की एक सहायक कंपनी की ओर से शुरू की गई कार्यवाही से जुड़ा है, जिसने कंपनी के मुश्किल दौर के दौरान निवेश किया था।

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