
डायरेक्ट टैक्स ( सौजन्य : सोशल मीडिया )
नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव 2024 के बाद मोदी सरकार कल पहली बार अपना आम बजट पेश करने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल संसद में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश करने वाली है। इस बजट को पेश करने से पहले कयास लगाए जा रहे है कि इस बार का बजट 2047 तक का रोडमैप साबित हो सकता है।
बजट आने से पहले ही सरकार पर आरोप लगने शुरू हो गए है। कुछ विशेषज्ञों ने सरकार पर सैलरीड क्लास के टैक्सपेयर्स को लेकर आरोप लगाया है। उन्होंने बताया है कि सरकार फिर एक बार ऐसा बजट ला सकती है जिसमें सैलरीड क्लास के टैक्सपेयर्स का शोषण हो सकता है।
बजट से पहले कुछ एनालिस्ट ने सैलरीड क्लास के लोगों को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने ये तर्क दिया है कि भारत में सबसे ज्यादा शोषण सैलरीड क्लास के टैक्सपेयर्स का होता है। साथ ही उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि साधारण नौकरी करने वाले कर्मचारी से पहले ही टैक्स कट जाता है, जबकि देश के बड़े बिजनेसमैन या किसान टैक्स देने से बच जाते है। ये भी एक कारण है कि हर साल बजट आने से पहले सैलरीड क्लास के टैक्सपेयर्स को बजट में टैक्स पर रियायत देने की मांग हमेशा उठती है।
सैलरीड वर्ग से जुड़े टैक्सपेयर्स से मिलने वाले डायरेक्ट टैक्स से सरकार सबसे ज्यादा कमाई करती है। डायरेक्ट टैक्स सरकार की कमाई का सबसे मुख्य जरिया है। इस डायरेक्ट टैक्स में शामिल इंडिविजुअल इनकम टैक्स और कॉरपोरेट इनकम टैक्स से सरकार की मोटी कमाई होती है। इस महीने की शुरूआत में इस टैक्स से जुड़े कुछ आंकड़े सामने आए है। इन आंकड़ों के अनुसार पता चला है कि इस वित्त वर्ष में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में भारी इजाफा हुआ है। ये 24.07 फीसदी बढ़कर 5.74 लाख करोड़ रुपये हो गया है। ये आंकड़े 11 जुलाई की तारीख तक के है।
22 जुलाई यानी आज से संसद में नया मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। इस विशेष सत्र के दूसरे दिन 23 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए यूनियन बजट पेश करने जा रही है। बजट पेश करने से पहले सोमवार को संसद में आर्थिक समीक्षा पेश की जाने वाली है। इस बजट के पेश होने के बाद पता चल सकता है कि इस बजट में सैलरीड क्लास का शोषण जारी रहता है या उन्हें सरकार कुछ राहत दे सकती है।






