
भारतीय उपभोक्ता (सौजन्य : सोशल मीडिया )
नई दिल्ली : देश की आम जनता महंगाई से काफी ज्यादा परेशान है। साबुन से लेकर तेल तक की महंगी कीमतों ने देशवासियों की कमर तोड़ दी है। इसी सिलसिले में मार्केटिंग डेटा और एनालिटिक्स कंपनी कांतार ने हाल ही में एक सर्वे किया है। इस सर्वे में केंद्रीय बजट सर्वेक्षण के चौथे एडिशन के रिजल्ट जारी किए हैं। ये सर्वे 1 फरवरी, 2025 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले इंडियन कंज्यूमर्स की भावनाओं और उम्मीदों के बारे में जानकारी देता है। कांतार की रिपोर्ट के अनुसार, 59 प्रतिशत भारतीय मंहगाई से परेशान हैं। आइए जानते हैं कि क्या इस बार के बजट से आम जनता को राहत मिल सकती है या नहीं?
साल 2025 में इंडियन कंज्यूमर्स की भावना में गिरावट वाले कॉन्फिडेंस और मिक्सड इमोशन का मेलजोल दिखायी देता है। हालांकि 67 प्रतिशत भारतीयों ने इस बात को स्वीकार किया है कि साल 2024 का बजट उनकी उम्मीदों के हिसाब से हो सकता है, ये संख्या साल 2022 से लगातार घट रही है। जीडीपी की धीमी रफ्तार के चलते, भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ के बारे में आशा भी घटी है।
भारतीय कंज्यूमर इनकम टैक्स में राहत, मेडिकल इंश्योरेंस की छूट की सीमा बढ़ाना और मुद्रास्फीति से निपटने के उपायों की डिमांड की जा रही हैं। हालांकि एआई के गलत इस्तेमाल और फाइनेंशियल सिक्योरिटी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ग्लोबल चैलेंजेस के चलते आर्थिक मंदी को लेकर चिंता पिछले साल की अपेक्षा में कम हुई है। ज्यादातर लोगों को इस बार के बजट से उम्मीद है कि साल 2025 का केंद्रीय बजट संरक्षणवादी पॉलिसी को लागू करके इकोनॉमिक ग्रोथ को प्रोत्साहित करने पर फोकस होगा। इसके कारण लगातार विकास, रोजगार सृजन और जिंदगी की उच्च लागत जैसी चुनौतियों का सोल्यूशन हो सकता है।
67 प्रतिशत भारतीयों का ये मानना है कि आने वाला बजट उनकी उम्मीदों पर खरा साबित हो सकता है। हालांकि इसके बारे में पॉजिटिव सोच रखने वाले लोगों के आंकड़े में पिछले 2 सालों में काफी कमी आयी है। ये आंकड़ा साल 2022 में 73 प्रतिशत से घटकर 70 प्रतिशत तक हो गया है। जिससे ये बात साफ हो गई है कि समय के साथ बजट को लेकर जनता की सहमति में भी गिरावट को दिखाता है।
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भारत की जीडीपी में हाल ही में गिरावट आयी है, भारत की जीडीपी इस समय 6.4 प्रतिशत हैं। इस गिरावट के चलते 53 प्रतिशत का ये मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अब पिछले सालों की तुलना में काफी तेजी से बढ़ सकती है, लेकिन आंकड़ों के अनुसार साल 2024 के लिए इसमें 57 प्रतिशत की कमी आयी है।






