
निर्मला सीतारमण, फोटो- सोशल मीडिया
Union Budget 2026 Expectations: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 यानी रविवार को देश का आगामी बजट संसद के पटल पर पेश करेंगी। यह भारत के इतिहास में पहली बार होगा जब बजट छुट्टी वाले दिन पेश किया जा रहा है। इस बजट से मध्यम वर्ग, किसानों और निवेशकों को कई बड़ी उम्मीदें हैं।
भारत के संसदीय इतिहास में वर्ष 2026 का बजट एक विशेष स्थान रखने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी और यह दिन रविवार यानी सार्वजनिक छुट्टी का दिन है। आमतौर पर बजट कार्यदिवसों पर पेश किया जाता रहा है, लेकिन यह पहला मौका होगा जब छुट्टी वाले दिन देश की आर्थिक दिशा तय की जाएगी। देश के विभिन्न क्षेत्रों (सेक्टर्स) ने इस बजट को लेकर अपनी उम्मीदें और मांगें सरकार के सामने रखी हैं, जिन पर सकारात्मक फैसलों का इंतजार है।
नौकरीपेशा वर्ग के लिए बजट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हमेशा इनकम टैक्स ही रहता है। पिछले साल सरकार ने 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को टैक्स मुक्त कर दिया था और वेतनभोगी कर्मचारियों को 75 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ दिया था। इस बार टैक्सपेयर्स की मांग है कि कर छूट की इस सीमा को 12 लाख से बढ़ाकर 14 लाख रुपये किया जाए। लोगों को उम्मीद है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार इस बार छूट का दायरा बढ़ाएगी ताकि उनके पास खर्च के लिए अधिक बचत बच सके।
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को लेकर भी इस बार के बजट में बड़े ऐलान की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान नियमों के अनुसार, नॉन-गवर्नमेंट सेक्टर के कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय 80% फंड निकालने की अनुमति है, जबकि 20% एन्युटी के लिए सुरक्षित रखा जाता है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार 80% फंड निकासी को पूरी तरह टैक्स फ्री (शून्य टैक्स) करने का ऐलान कर सकती है। इसके अलावा, NPS छूट को नए टैक्स रिजीम में शामिल करने की भी मांग की जा रही है ताकि सेवानिवृत्ति के बाद लोगों को बेहतर आर्थिक सहारा मिल सके।
सर्राफा बाजार इस समय बड़ी कीमतों की चुनौती से जूझ रहा है। वर्तमान में चांदी की कीमत 3 लाख रुपये और सोने की कीमत 1.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिससे यह आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। कीमतों में इस भारी उछाल के कारण ज्वैलरी शॉप्स पर मांग और सप्लाई में बड़ा अंतर देखा जा रहा है। ग्राहक दुकानों से नदारद हैं, जिसे देखते हुए मांग की जा रही है कि सरकार सोने-चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) और जीएसटी (GST) दरों में कटौती करे। टैक्स में राहत मिलने से ही बाजार में दोबारा रौनक लौटने की उम्मीद है।
देश के अन्नदाताओं को भी इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। पीएम कृषि सम्मान निधि योजना के तहत अभी किसानों को सालाना 6 हजार रुपये मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये करने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की भी उम्मीद जताई गई है।
यह भी पढ़ें: Budget 2026: क्या आज बदलेगी आम आदमी की किस्मत? इन 3 आंकड़ों को देख झूम उठेंगे आप
वहीं, बीमा सेक्टर में सरकार ने पहले ही 100 फीसदी FDI को मंजूरी दे दी है और इसे 0% जीएसटी कैटेगरी में रखा जा चुका है। अब उम्मीद है कि लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस को ग्रामीण क्षेत्रों तक गहराई से पहुंचाने के लिए सरकार एक नया और मजबूत फ्रेमवर्क तैयार करेगी।






