
भारत में दो बार बजट पेश होने से पहले लीक हो हुआ है (सोर्स- सोशल मीडिया)
When India Budget Leaked: किसी भी देश और उसके लोगों का सालभर का भविष्य इस पर निर्भर करता है कि सरकार के सालाना बजट में जनता के लिए क्या योजनाएं और क्या प्रतिबंध हैं। इसलिए बजट को पेश होने से पहले पूरी तरह गुप्त रखा जाता है। फिर भी, भारत के इतिहास में दो ऐसे मौके आए हैं जब बजट पेश होने से पहले ही लीक हो गया।
साल1948 और 1950 का बजट दो बड़ी घटनाओं दौर पर पेश किया गया। यह वही बजट थे जिसकी गोपनीय जानकारी पहले ही लीक हो गई थी। केंद्रीय बजट से जुड़े कुछ सीक्रेट पेज प्रेस में पेश होने से पहले ही सार्वजनिक हो गए, जिससे पूरी सरकार हिल गई। इस घटना के बाद सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए, जो बजट की गोपनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुए।
आजादी के बाद देश का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया जाना था। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसकी तैयारी की जिम्मेदारी सर आर.के. शनमुखम चेट्टी को सौंपी थी। यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक, यानी केवल साढ़े सात महीनों के लिए था। उस समय भारत में ब्रिटिश काल की परंपरा के अनुसार शाम 5 बजे बजट पेश करने का चलन था। लेकिन इससे पहले कि चेट्टी बजट पेश कर पाते, इसका लगभग पूरा विवरण मीडिया में लीक हो गया।
द गार्डियन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, बजट लीक होने की मुख्य वजह ब्रिटिश सरकार थी। उस समय यह भारत का पहला बजट था, इसलिए नेता और अधिकारी ब्रिटेन के साथ सलाह-मशविरा करना चाहते थे। इसी कारण बजट के दस्तावेज तत्कालीन ब्रिटिश वित्त मंत्री ह्यू डॉल्टन को भेज दिए गए थे, जिससे लीक होने की संभावना बढ़ गई।
साल 1950 में बजट के दस्तावेज राष्ट्रपति भवन के प्रेस में छपते थे। यह स्थान संवेदनशील सरकारी दस्तावेजों के लिए सुरक्षित माना जाता था, लेकिन संसद में बजट पेश होने से पहले ही वित्तीय प्रस्तावों का विवरण लीक हो गया। हालांकि, लीक किसने किया और कैसे हुआ, इसका आधिकारिक तौर पर कभी खुलासा नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने गोपनीयता को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी, खासकर उस समय जब स्वतंत्र भारत का आर्थिक ढांचा आकार ले रहा था।
1950 में देश के वित्त मंत्री जॉन मथाई थे। इस घटना को स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी प्रशासनिक चूक माना गया और सरकार की किरकिरी हुई। यही कारण था कि वित्त मंत्री को इस घटना के बाद अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बदलाव किए गए और बजट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी इसे पेश होने तक बाहरी दुनिया से कटे रहते हैं।
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इस घटना ने सुरक्षा उपायों में बदलाव को अनिवार्य बना दिया। भविष्य में दोबारा ऐसा न हो, इसलिए केंद्रीय बजट की छपाई के लिए अधिक सुरक्षित और एकांत स्थान चुना गया। बजट के दस्तावेजों की छपाई अब मिंटो रोड स्थित भारत सरकार प्रेस में होती है। इसके साथ ही सुरक्षा के कड़े नियम लागू किए गए, जैसे प्रतिबंधित प्रवेश, सीलबंद परिसर, और “लॉक-इन” परंपरा, जिसके तहत बजट छपाई में शामिल अधिकारी बजट पेश होने तक बाहरी दुनिया से अलग रहते हैं।
Ans: भारत में बजट दो बार लीक हुआ, 1948 और 1950 में। 1948 में ब्रिटिश सलाह-मशविरा कारण था और 1950 में बजट राष्ट्रपति भवन में छपने से पहले लीक हो गया।
Ans: 1948 का बजट ब्रिटिश सरकार को भेजे जाने के कारण लीक हुआ। यह स्वतंत्र भारत का पहला बजट था और अधिकारी ब्रिटेन से सलाह लेना चाहते थे।
Ans: 1950 में बजट लीक होने के बाद वित्त मंत्री जॉन मथाई को इस्तीफा देना पड़ा। इस घटना ने प्रशासनिक और सुरक्षा खामियों को उजागर किया।
Ans: बजट छपाई अब अधिक सुरक्षित स्थान मिंटो रोड प्रेस में होती है, प्रवेश प्रतिबंधित किया गया और अधिकारियों को “लॉक-इन” परंपरा के तहत पेश होने तक बाहरी दुनिया से अलग रखा जाता है।
Ans: “लॉक-इन” परंपरा में बजट छपाई में शामिल अधिकारी पेश होने तक किसी से संपर्क नहीं करते। इसका उद्देश्य बजट की पूरी गोपनीयता बनाए रखना है।






