
अजित पवार (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
Pune News In Hindi: 1999 के बाद से अजित पवार पुणे जिला परिषद, पुणे महानगर पालिका और पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका की सत्ता संरचना के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे, उनकी ‘एंग्री यंग मैन’ की छवि ने प्रशासनिक तंत्र में अनुशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच प्रभावशाली उपस्थिति सुनिश्चित की।
एक प्रशासक के रूप में उन्होंने नौकरशाही पर मजबूत नियंत्रण स्थापित किया। अविभाजित कांग्रेस के दौर में जिला परिषद, जिला बैंक और सहकारी संस्थाओं पदाधिकारियों के चयन में सामूहिक सहमति की परंपरा थी।
राष्ट्रवादी कांग्रेस की स्थापना के बाद इन सत्ता केंद्रों की कमान धीरे-धीरे अजित पवार के हाथों में आती गई। किसी शासकीय या सहकारी संस्था का कामकाज सुचारू नहीं होता, तो वे सार्वजनिक रूप से फटकार लगाने से भी नहीं हिचकते थे।
जहां शरद पवार समावेशी राजनीति के लिए पहचाने जाते थे, वहीं अजित पवार का सख्त और स्पष्ट शैली वाला व्यक्तित्व अलग पहचान बनाता था। पुणे जिप की नई इमारत को आधुनिक, कॉरपोरेट दफ्तर जैसा स्वरूप देने, भव्य जिलाधिकारी कार्यालय और सरकारी विश्रामगृह जैसे प्रकल्पों में भी गुणवता और आधुनिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया।
प्रशासनिक ढांचे में ‘कॉरपोरेट कार्यशैली’ लाने का यह प्रयोग राज्य में सबसे पहले पुणे में दिखाई दिया। कांग्रेस के दिवंगत नेता सुरेश कलमाडी से मतभेदों के बावजूद, 2007 में अजित पवार ने पुणे महानगर पालिका के कामकाज में सीधे हस्तक्षेप कर भाजपा के समर्थन से तथाकथित ‘पुणे पैटर्न’ तैयार किया।
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उनके कार्यकाल में राजलक्ष्मी भोसले, दत्तात्रय धनकवडे, वैशाली बनकर, चंचला कोद्रे, मोहन सिंह राजपाल और प्रशांत जगताप जैसे नगरसेवकों को महापौर पद का अवसर मिला। स्थायी समिति में भी उन्होंने सक्षम चेहरों को आगे बढ़ाया, कांग्रेस नेता रामकृष्ण मोरे के निधन के बाद पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका में बड़े विकास प्रकल्पों और सड़क चौड़ीकरण जैसे कार्यों को गति मिली, जिससे शहर का बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ।






