आज से भारत- किर्गिस्तान के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि हुई लागू, आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान

हाल ही में भारत और किर्गिस्तान के बीच में द्विपक्षीय निवेश संधि को लागू आज से ही लागू कर दिया गया है। आपको बता दें कि 14 जून, 2019 को बिश्केक में द्विपक्षीय निवेश संधि यानी बीआईटी पर साइन किए गए थे।
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भारत और किर्गिस्तान (सौ. सोशल मीडिया )
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नई दिल्ली : ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हालात पूरी तरीके से बिगड़ गए हैं। हालांकि इस स्थिति में भारत ने किर्गिस्तान के साथ द्विपक्षीय निवेश संधि करने का फैसला लिया है। जिसके लिए गुरूवार को द्विपक्षीय निवेश संधि को लागू करने के लिए एक कॉन्ट्रेक्ट पर साइन किए हैं। इस संधि से भारत और किर्गिस्तान के बीच में इकोनॉमिक रिश्तों को बढ़ावा देने और सीमापार इंवेस्टमेंट को प्रोत्साहित करने में हेल्प मिलेगी।

भारत सरकार और किर्गिज गणराज्य की सरकार के बीच 14 जून, 2019 को बिश्केक में द्विपक्षीय निवेश संधि यानी बीआईटी पर साइन किए गए थे। अब यह संधि 5 जून, 2025 से प्रभावी हो गई है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि नई निवेश संधि 12 मई, 2000 को लागू पिछले कॉन्ट्रेक्ट की जगह लेगी।

बीआईटी द्विपक्षीय इकोनॉमिक

मंत्रालय ने कहा है कि भारत-किर्गिज बीआईटी द्विपक्षीय इकोनॉमिक रिलेशन को मजबूत करने और सुरक्षित एवं पूर्वानुमानित निवेश परिवेश को बढ़ावा देने में एक मील का पत्थर है। बीआईटी का उद्देश्य दूसरे देश के सेक्टर में किसी भी देश के इंवेस्टर्स के हितों को बढ़ावा देना और उनकी रक्षा करना है।

मोस्ट फेवरड नेशन

बीआईटी की कुछ प्रमुख विशेषताओं में टिकाऊ बढ़त पर जोर देना और सबसे पसंदीदा राष्ट्र यानी मोस्ट फेवरड नेशन की पहचान को हटाना शामिल है। द्विपक्षीय निवेश संधि में कुछ 'अपवाद' भी हैं। इसका अर्थ है कि सरकारें कुछ मामलों में अपनी पॉलिसी को लागू करने के लिए स्वतंत्र रहेंगी। इनमें पर्यावरण, लोगों का स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, सार्वजनिक नैतिकता और सिस्टम रखने जैसे अपवाद शामिल हैं।

लोकल एडमिनिस्ट्रेशन

इसके अलावा निवेशकों और सरकार के बीच कोई विवाद होने पर पहले लोकल लेवल पर मामले को सुलझाने की कोशिश की जाएगी। इससे इंवेस्टर्स को विवादों को निपटाने के लिए नए और बेहतर ऑप्शन मिलेंगे। कुछ मामलों को संधि के दायरे से बाहर रखा गया है जिनमें लोकल एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े मामले, कर, सरकारी खरीद और लाइसेंसिंग शामिल हैं।

इससे सरकार के पास इन सेक्टरों में अपनी पॉलिसी बनाने और लागू करने की पर्याप्त स्वतंत्रता बनी रहेगी। बयान के अनुसार, यह संधि निवेशकों के अधिकारों को दोनों देशों की संप्रभु नियामक शक्तियों के साथ संतुलित करती है और एक लचीला एवं पारदर्शी निवेश माहौल बनाने के लिए साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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