एक हफ्ते में 3 दिन छुट्टी और 4 दिन काम, क्या नए लेबर कोड में है ऐसा कानून? जानिए पूरी डिटेल

New Labour Code: नए लेबर कोड्स के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी से रोजाना 12 घंटे या साप्ताहिक 48 घंटे से ज्यादा काम कराया जाता है, तो उसे ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से करना होगा।
New Labour Code
(कॉन्सेप्ट फोटो)
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Working Day's In New Labour Code:  भारत में ज्यादातर सरकारी और निजी दफ्तरों में 5-डे वर्क वीक का सिस्टम चलता है, लेकिन अब कर्मचारी 4-डे वर्क वीक की उम्मीद लगाने लगे हैं। जापान, स्पेन और जर्मनी जैसे देशों में इस मॉडल पर प्रयोग हो चुके हैं, जिससे भारत में भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या यहां भी हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम संभव है। हाल ही में नए लेबर कोड्स को लेकर श्रम मंत्रालय के बयान के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, नए लेबर कोड्स में 4-डे वर्क वीक की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया गया है। मंत्रालय ने साफ किया है कि कर्मचारी चाहें तो हफ्ते के 4 दिन, रोजाना 12 घंटे काम कर सकते हैं और बाकी 3 दिन पेड छुट्टी ले सकते हैं। हालांकि, यह पूरी तरह नियोक्ता और कर्मचारी के बीच आपसी सहमति पर निर्भर करेगा। यानी कोई भी कंपनी इसे अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए बाध्य नहीं है।

वर्किंग टाइमिंग में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने यह भी साफ किया है कि साप्ताहिक कार्य समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नए नियमों के तहत हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे काम करने की सीमा तय है। अगर कोई कर्मचारी 4-डे वर्क वीक चुनता है, तो उसे रोजाना 12 घंटे काम करना होगा। इसमें ब्रेक का समय और काम का फैलाव भी शामिल होगा। अगर कंपनी कर्मचारी से तय सीमा से ज्यादा काम कराती है, तो उसे ओवरटाइम देना होगा।

ओवरटाइम पर दोगुना सैलरी का प्रावधान

नए लेबर कोड्स के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी से रोजाना 12 घंटे या साप्ताहिक 48 घंटे से ज्यादा काम कराया जाता है, तो उसे ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से करना होगा। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के शोषण को रोकना और काम-जीवन संतुलन को बेहतर बनाना है। इससे कर्मचारियों को यह भरोसा मिलेगा कि अतिरिक्त मेहनत का उचित मुआवजा जरूर मिलेगा।

नए लेबर कोड्स में और क्या बदला?

21 नवंबर 2025 को सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर चार नए लेबर कोड लागू किए। इनमें वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े नियम शामिल हैं। नए कोड्स के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के बराबर सुविधाएं मिलेंगी और वे सिर्फ एक साल की सेवा में ग्रेच्युटी के हकदार होंगे। वहीं पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी कानूनी पहचान दी गई है। कंपनियों को इनके वेलफेयर फंड में योगदान देना होगा, जिससे असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को भी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।