लिव इन में रहना होगा मुश्किल...दो शादी करने पर 7 साल की जेल, गुजरात UCC के मसौदे में हैरान करने वाले प्राविधान

Gujarat News: देवभूमि उत्तराखंड के बाद एक और बीजेपी शासित राज्य गुजरात ने भी समान नागरिक संहिता यानी यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की तरफ कदम बढ़ा दिया है। जिसमें कई बड़े प्राविधान किए गए हैं।
gujarat ucc draft proposes jail for second marriage and strict rules on live in relationships
UCC मसौदे के साथ गुजरात कैबिनेट (सोर्स- CMO)
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Gujarat UCC Draft: देवभूमि उत्तराखंड के बाद एक और बीजेपी शासित राज्य गुजरात ने भी समान नागरिक संहिता यानी यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की तरफ कदम बढ़ा दिया है। गुजरात कैबिनेट की बैठक में बुधवार को UCC विधेयक के ड्राफ्ट यानी मसौदे को मंजूरी दे दी गई है। मसौदा विधानसभा सचिवालय पहुंचा दिया गया और सरकार इसे मौजूदा सेशन में ही पारित करवाने की फिराक में है।

गुजरात यूनिफॉर्म सिवल कोड 2026 बिल सदन से पारित होने के बाद राज्य में सभी समुदायों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव इन रिलेशनशिप के नियम एक जैसे हो जाएंगे। हालांकि, आदिवासियों की अच्छी आबादी वाले राज्य में अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा जा सकता है।

विवाह-तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी

बिल में शादी की रस्में धार्मिक रीति-रिवाजों के मुताबिक होंगी, लेकिन प्रस्तावित विधेयक में विवाह और तलाक के लिए रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य किया गया है। जिसका पालन नहीं करने पर 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया जा सकता है। इतना ही नहीं उत्तराखंड की तरह ही गुजरात में भी लिव इन रिलेशनशिप को कानूनी दायरे में लाने की व्यवस्था की जाएगी।

लिव इन वालों के लिए बड़े प्राविधान

इसके साथ ही जिला रजिस्ट्रार के पास लिव इन के दोनों पार्टनर को अपने रिश्ते को पंजीकृत करना होगा। लिव-इन में साथ रहने के अलावा अलग होने के फैसले को भी नोटिफाई करना होगा। इतना ही नहीं ऐसे रिश्ते से यदि किसी बच्चे का जन्म होगा तो उसे वैधता होगी और सभी अधिकार प्राप्त होंगे। किसी महिला को उसका लिव इन पार्टनर छोड़ता है तो वह गुजरा भत्ता मांगने की हकदार होगी।

सभी धर्मों में शादी की उम्र बराबर

मसौदे के मुताबिक, सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी की उम्र भी समान होगी। पुरुषों के लिए यह उम्र न्यूनतम 21 और महिलाओं के लिए 18 रखी गई है। अगर दोनों भागीदारों में से कोई एक भ्रामक जानकारी प्रदान करता है तो विवाह को रद्द करने योग्य माना जाएगा।

एक से ज्यादा पत्नी रखने पर जेल

इसके अलावा इस यूनिफार्म सिविल कोड 2026 में बहुविवाह पर रोक का प्रावधान भी किया गया है। ऐसे में कोई शख्स कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी या तीसरी शादी करता है, यह फिर वह एक से अधिक पत्नियां रखता है तो उसे सात साल तक की जेल हो सकती है।

उत्तराधिकार पर क्या प्राविधान?

विधेयक में उत्तराधिकार को लेकर भी सभी धर्मों के लोगों के लिए एक जैसे नियम होंगे। मसौदे में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति वसीयत नहीं बनाता है तो उस स्थिति में उत्तराधिकारियों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली श्रेणी के उत्तराधिकारी, दूसरी श्रेणी के उत्तराधिकारी और अन्य रिश्तेदार।

पहली कैटेगरी के उत्तराधिकारियों में पति/पत्नी, बच्चे और माता-पिता शामिल होंगे। दूसरी कैटेगरी के उत्तराधिकारियों में सौतेले माता-पिता, दादा-दादी और नाना-नानी शामिल होंगे। आखिरी कैटेगरी यानी अन्य रिश्तेदारों में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के व्यक्तियों के अलावा अन्य व्यक्ति शामिल होंगे।

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